जब दीदियों के खाते में आई उम्मीद… भागलपुर की महिलाएं बोलीं – “अब हम सिर्फ सपने नहीं देखेंगी, उन्हें साकार करेंगी
भागलपुर। टाउन हॉल के सभागार में जब स्क्रीन पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का चेहरा उभरा, और उनकी आवाज़ गूंजी — आप सबको ₹10,000 की आर्थिक सहायता भेजी जा रही है… तो नज़ारा बदल गया।
किसी के चेहरे पर मुस्कान थी, किसी की आंखों में नमी। कुछ ने एक-दूसरे को गले लगा लिया, और कुछ ने मोबाइल स्क्रीन पर एसएमएस देखते हुए कहा — पहुंच गया बहिन, पैसा पहुंच गया!
ये कोई आम दिन नहीं था। ये दिन था आर्थिक आत्मनिर्भरता की शुरुआत का।
मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत भागलपुर की 1 लाख 2 हजार 401 महिलाओं के बैंक खातों में ₹10-10 हजार की राशि भेजी गई — किसी अनुदान की तरह नहीं, बल्कि विश्वास की पहली किस्त के तौर पर।
जीविका दीदी” अब केवल नाम नहीं, पहचान है…
सुनीता देवी, एक छोटे से गांव की गृहिणी, अब अपने घर के कोने में सिलाई मशीन लाने का सपना देख रही हैं। रेणु कुमारी सोच रही हैं – क्यों न दो बकरियाँ खरीदकर दूध बेचने का काम शुरू किया जाए?
इस योजना ने सिर्फ पैसा नहीं दिया, एक नई सोच दी है।
जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी जब मंच से बोले – दीदी लोग, अगर इस पैसे से रोजगार शुरू करती हैं और सफल होती हैं, तो सरकार आगे 2 लाख रुपये तक की मदद करेगी। तो तालियों की गूंज ने बता दिया – भागलपुर की महिलाएं अब सुन नहीं रहीं, कुछ कर दिखाने की ठान चुकी हैं।
2.65 लाख महिलाएं एक साथ हुईं शामिल – एक डिजिटल क्रांति का हिस्सा बनीं
सोचिए, एक साथ 2 लाख 65 हजार से अधिक महिलाएं जिले भर से ऑनलाइन जुड़ीं।
16 प्रखंडों, 1971 ग्राम संगठनों और 47 संघों में लगा था लाइव स्क्रीन। गांव-गांव में चौपालों की जगह अब ‘डिजिटल दीवारें’ हैं, जहाँ बदलाव लाइव देखा जा सकता है।
ये सिर्फ योजना नहीं, एक आंदोलन है जब पैसे की ज़रूरत होती है, तो बच्चे मां के पास जाते हैं… और मां अगर खुद कमाने लगे, तो घर की तस्वीर ही बदल जाती है…
– डॉ. नवल किशोर चौधरी की ये बात तालियों में खो गई, लेकिन दीदियों के दिल में बस गई।
अब तक भागलपुर में:
3.85 लाख से अधिक आवेदन जमा हो चुके हैं।जिनमें से 3.77 लाख की ऑनलाइन एंट्री हो चुकी है। और 3.20 लाख महिलाएं पहले से ही जीविका समूह से जुड़ी हुई हैं। शेष महिलाओं को भी 6 अक्टूबर 2025 को आयोजित अगले कार्यक्रम में लाभ मिलेगा।
औरतें अब सिर्फ घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं – वो आत्मनिर्भरता का चेहरा बन रही हैं
“पहले लगता था, ये सरकारी योजनाएं सिर्फ कागज़ पर होती हैं,” – नीलम देवी बताती हैं, पर जब मोबाइल में मैसेज आया कि ₹10,000 आ गए, तो लगा सरकार ने भरोसा जताया है। अब हम भी कुछ बड़ा करेंगे।



