कहलगांव में शोक की लहर, जदयू प्रत्याशी शुभानंद मुकेश की दादी, स्व. सदानंद सिंह की माताजी कामिनी देवी का निधन

भागलपुर। कहलगांव विधानसभा क्षेत्र में आज गहरा शोक का माहौल छा गया। क्षेत्र की जानी-मानी समाजसेविका और बिहार विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष स्व सदानंद सिंह की माताजी कामिनी देवी (101 वर्ष) का निधन हो गया। वे जदयू प्रत्याशी शुभानंद मुकेश की दादी थीं। उनके निधन की खबर मिलते ही न केवल कहलगांव, बल्कि पूरे भागलपुर जिले में शोक की लहर दौड़ गई।

मुकेश ने बताया कि अपने सौम्य स्वभाव, धार्मिक आस्था और सेवा भावना के लिए जानी जाती थीं। उन्होंने जीवनभर सादगी और अनुशासन को अपना आदर्श बनाए रखा।परिवार के करीबी लोगों के अनुसार, वे वृद्धावस्था में भी रोज़ पूजा-पाठ, व्रत और सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहती थीं। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन गया।उन्होंने हमें सिखाया कि सच्चाई और सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं।

 शुभानंद मुकेश ने अपनी दादी को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि वे उनके लिए संस्कार और प्रेरणा की पाठशाला थीं। उन्होंने बताया कि नॉमिनेशन के दिन दादी ने उन्हें तिलक कर आशीर्वाद दिया था, और पिछले चुनाव में स्वयं मतदान केंद्र जाकर उनके लिए वोट भी डाला था। मुकेश ने बताया कि उनका आशीर्वाद और उनके आदर्श ही मेरे सार्वजनिक जीवन की दिशा तय करेंगे। वे भले अब शारीरिक रूप से न हों, पर उनका आशीर्वाद हमेशा साथ रहेगा। कामिनी देवी के निधन पर अनेक राजनीतिक हस्तियों, जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों ने गहरी संवेदना व्यक्त की। शोक व्यक्त करने वालों में शामिल रहे,सांसद अजय मंडल,विधायक प्रो. ललित नारायण मंडल,पूर्व सांसद कहकशां परवीन,पूर्व विधायक लक्ष्मीकांत मंडल, जदयू नेता सुड्डू साईं, जदयू जिला अध्यक्ष विपिन बिहारी सिंह, कार्यकारी अध्यक्ष विवेकानंद गुप्ता, जिला प्रवक्ता शैलेंद्र तोमर, महानगर अध्यक्ष संजय शाह, उपाध्यक्ष (अति पिछड़ा प्रकोष्ठ) धनंजय मंडल, राकेश ओझा, कल्याणी देवी, चंद्रशेखर मिश्रा, मनोज मंडल, और विभिन्न प्रकोष्ठों के अध्यक्ष -सोनी कुमारी (महिला), गोलू मंडल (छात्र), संतोष पटेल (युवा), नंदन राय (किसान), महेश दास (अनुसूचित जाति), शिपु मंडल सहित अनेक कार्यकर्ताओं ने गहरी संवेदना प्रकट की।

कहलगांव और आसपास के गांवों में लोगों ने कहा कि कामिनी देवी सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की मातृशक्ति थीं।उनका स्नेहिल स्वभाव और जनसेवा की भावना आने वाले समय में भी लोगों के दिलों में जीवित रहेगी।

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