मशरूम का उत्पादन कर विशुनपुर की महिलाएं हो रही आत्मनिर्भर
गुमला: झारखंड के कई जिले में कृषि विभाग के उद्यान निदेशालय के द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई तरह के कार्यक्रम चला रही है। उनमें से मशरूम का उत्पादन से भी एक है। ग्रामीण आदिवासी महिलाएं इससे अपनी आमदनी बढ़ा रही हैं। विशुनपुर के दर्जनों गांवों में महिलाएं मशरूम का उत्पादन कर रही हैं। ग्रामीण महिलाओं को एपीपी एग्रीगेट के द्वारा प्रशिक्षण और बीज उपलब्ध कराया जाता है। एक लाभुक को पचास बैग दिया जाता है। एक बैग से करीब से छह से आठ केजी मशरूम का उत्पादन मात्र 21 दोनों में हो जाता है।
विशनपुर के गोराटोली,हिटोली,मंजीरा सहित अन्य गांव में इसका उत्पादन हो रहा है। ग्रामीण महिला प्रेमा देवी,जयंती उरांव,कमली देवी सहित कई महिलाओं ने उत्साह के साथ कहा कि राज्य सरकार की इस स्कीम से महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही है। हमलोग मशरूम से बरी,आचार,पापड़ सहित कई चीजों का निर्माण करते हैं। यही नहीं हमलोहों को इसे बेचने के लिए बाजार जाना नहीं पड़ता है। एपीपी एग्रीगेट हमारे गांव आकार खरीद लेते हैं।
वहीं एपीपी एग्रीगेट के निदेशक प्रभाकर कुमार ने कहा कि मशरूम हेल्थ और वेल्थ दोनों के लिए अच्छा होता है। ग्रामीण क्षेत्रों में कई महिलाएं कुपोषण की शिकार हो जाती हैं। ऐसे में उन्हें मशरूम का सेवन कराया जाय तो उनको बहुत लाभ होगा। साथ ही महिलाएं मशरूम का उत्पादन करे तो उनकी आमदनी भी बढ़ेगी।

