झारखंड और बिहार में ठनका बरपा रहा कहरः
झारखंड में एक सप्ताह में 10 और बिहार में पिछले तीन में ठनका ने ले ली 26 की जान
रांचीः झारखंड और बिहार में ठनका (आकाशीय बिजली) कहर बरपा रहा है। झारखंड में पिछले एक सप्ताह में ठनका ने 10 और बिहार में पिछले तीन दिन में 26 लोगों की मौत हो गई। बिहार में बुधवार को 16 गुरुवार को पांच और शुक्रवार को पांच लोगो की मौत ठनका से हुई। वहीं झारखंड में झारखंड में रांची, खूंटी, हजारीबाग, सिमडेगा और पश्चिमी सिंहभूम ठनका के लिए सबसे खतरनाक माने गये हैं. पांचों जिले थंडरिंग जोन में हैं. इन जिलों में ठनका गिरे, तो जान आफत में आ सकती है. थंडरिंग जोन की पहली श्रेणी में हजारीबाग है. झारखंड में दो तरह के थंडरिंग जोन हैं. इसमें लो क्लाउड (कम ऊंचाई के बादल) और माइक्रोस्पेरिक थंडरिंग शामिल हैं.लो क्लाउड थंडरिंग धरातल से 80 किलोमीटर तक की ऊंचाई पर होती है, जबकि माइक्रोस्पेरिक थंडरिंग की गतिविधि धरातल से 80 किलोमीटर से अधिक ऊंचाई पर होती है. लेकिन राज्य सरकार प्रदेश में लाइटनिंग (ठनका) से बचाव के लिए अब तक माकूल इंतजाम नहीं कर पायी है.ठनका से हुई मौत पर मुआवजा देने के एवज में सालाना लगभग 11 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं. ठनका से मौत होने पर मृत व्यक्ति के परिजन को चार लाख रुपये देने का प्रावधान है. जानवर की मौत पर 30 हजार रुपए, घर के नुकसान पर 95500 रुपए पूर्ण अपंग होने पर चार लाख रुपए और 50 फीसदी अपंग होने पर दो लाख रुपए मुआवजा देने का प्रावधान है. झारखंड सरकार ने ठनका से बचाव के लिए कई योजनाएं बनायी, लेकिन योजनाएं ठनका प्रभावित इलाकों में धरातल पर नहीं उतर पायीं, सिर्फ देवघर में छह और रांची के नामकुम में एक तड़ित रोधक यंत्र ही लगाया जा सका. योजना के तहत रांची के पहाड़ी मंदिर और जगन्नाथपुर मंदिर में भी तड़ित रोधक यंत्र लगाया जाना था.लेकिन अब तक नहीं लग पाया है। बताते चलें कि वर्तमान में देश के 400 से ज्यादा जिले वज्रपात प्रभावित हैं. ये जिले वज्रपात के करंट तीव्रता के स्केल वन के क्षेत्र में आ चुके हैं. इन जिलों में करंट की तीव्रता 1.3 बिलियन वोल्ट नापी जा चुकी है. झारखंड सहित उत्तर प्रदेश बिहार, मध्य प्रदेश इनके मैदानी पठारी और पहाड़ी क्षेत्रों में वज्रपात के कारण हुई मौतों की संख्या में अचानक भारी वृद्धि हुई है.

