ट्रिपल आईटी, भागलपुर से देश को शीघ्र मिलेगी साउंडलेस पावरलूम मशीन की सौगात, बुनकरों को शोर से मिलेगी राहत
भागलपुर। ट्रिपल आईटी, भागलपुर की टीम से अब देश के बुनकरों के लिए एक बड़ी सौगात मिलने वाली है। स्थानीय स्तर पर विकसित की गई साउंडलेस पावरलूम मशीन जल्द ही बाजार में उपलब्ध होगी, जो पारंपरिक पावरलूम से आने वाले तेज़ शोर को लगभग समाप्त कर देगी। इस तकनीक के आने से न सिर्फ कार्यस्थल का वातावरण शांत और सुरक्षित होगा, बल्कि बुनकरों की उत्पादन क्षमता और स्वास्थ्य में सुधार देखने की उम्मीद है।
इस आशय की जानकारी ट्रिपल आईटी, भागलपुर के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. गौरव कुमार ने दी है। उन्होंने कहा कि साउंडलेस पावरलूम के आने से कारीगरों को शोर से होने वाली बीमारियों से निजात मिलेगी और उत्पादन भी बढ़ेगा। रिसर्च टीम के डॉ गौरव बताते हैं कि इस प्रोजेक्ट को लेकर हाल ही में सेंट्रल सिल्क बोर्ड से विस्तारपूर्वक बातचीत हुई है। सिल्क डेवलपमेंट अथॉरिटी ने भी मदद करने की सहमति जताई है। उन्होंने बताया कि इस रिसर्च टीम को प्रारंभिक फंडिंग मिली थी और इसके बाद गुवाहाटी में इस पर काम किया गया। वर्तमान में प्रपोज़ल तैयार किया जा रहा है। इस तकनीक को हैंडलूम में भी इंटीग्रेट करने की योजना है।
ट्रिपल आईटी, भागलपुर के तकनीकी विशेषज्ञों की टीम के संयुक्त प्रयास से विकसित की जा रही यह मशीन आधुनिक तकनीक पर आधारित है। इसमें ऐसी इंजीनियरिंग का उपयोग किया गया है जो कंपन और शोर यानी दोनों को काफी हद तक नियंत्रित कर देती है। इसका सीधा लाभ उन बुनकरों को मिलेगा, जो वर्षों से मशीनों के तेज़ शोर में काम करते हुए सुनने की क्षमता में कमी और तनाव जैसी समस्याओं का सामना करते रहे हैं।
नई साउंडलेस पावरलूम मशीन न केवल शांत है, बल्कि ऊर्जा-संचय (energy efficient) भी है। विशेषज्ञों के अनुसार यह पारंपरिक मशीनों की तुलना में कम बिजली खर्च करती है और धागे की टूट-फूट को भी कम करती है। इससे कपड़ा उत्पादन बढ़ेगा और बुनकरों की आय में भी सकारात्मक वृद्धि होगी।
भागलपुर पहले से ही अपने तसर और रेशम उत्पादों के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। अब इस नई तकनीक के आने से क्षेत्र को पावरलूम उद्योग के नवाचार केंद्र के रूप में भी पहचान मिलने लगी है। कई बुनकरों ने इसे ‘भागलपुर ट्रिपल आईटी की ओर से देश को एक बड़ी तकनीकी सौगात’ बताया है।मालूम हो कि देश में बुनकरों की संख्या करीब 27 लाख है, जबकि इससे जुड़े कारीगरों की संख्या लगभग 49 लाख है। यानी कुल मिलाकर करीब 35 लाख लोग हस्तशिल्प से जुड़े हुए हैं।
सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार और केंद्र सरकार दोनों ही इस तकनीक को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाओं पर विचार कर रही हैं, ताकि अधिक से अधिक बुनकर इस मशीन का लाभ उठा सकें।
यदि बड़े पैमाने पर इसका उत्पादन शुरू होता है, तो यह देशभर के पावरलूम क्लस्टरों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है।



