झारखंड के कॉपरेटिव बैंक में 9.82 करोड़ की हेराफेरी, नियमों को ताक में रखकर डेटा सेंटर के लिए दे दी गई राशि
रांचीः झारखंड के कॉपरेटिव बैंक में 9.82 करोड़ रुपए की हेराफेरी का मामला सामने आया है। डेटा सेंटर के नाम पर राशि की हेराफेरी की गई है। बताते चलें कि कॉपरेटिव बैंक में 9.82 करोड़ का पहला डेटा सेंटर खोला गया, लेकिन तीन वर्ष में भी अभी तक यह शुरू नहीं किया जा सका है।
नियमों को ताक में रखकर दी गई राशि
डेटा सेंटर के लिए पूरी राशि नियमों को ताक में रखकर दे भी दी गई। पूरी राशि का 10 प्रतिशत हिस्सा गारंटी के रूप में बैंक को रखना था, लेकिन बिना किसी कटौती के यह राशि डेटा सेंटर का निर्माण करने वाली कंपनी को दे दी गई। जिसका खुलासा जांच रिपोर्ट में किया गया है। इस डेटा सेंटर का अभी हाल में ही इंजीनियरों द्वारा जांच की गई थी, जिसमें सारे लगाए गए उपकरण को आउटडेटेड बताया गया। जिसके बाद अब इस सेंटर के अस्तित्व पर ही निशान खड़ा हो गया है।
ऑडिट में भी पाई गई गड़बड़ी
बैंक के तत्कालीन सीइओ प्रेम प्रकाश द्वारा 2019 में ही करीब चार करोड़ रुपए का अंतिम भुगतान ई-सीगमा साल्यूशन कंपनी को दे दिया गया। जिसकी शिकायत मिलने के बाद जांच तत्कालीन संयुक्त निबंधक चंद्रदेव रंजन ने जांच करायी थी और जांच रिपोर्ट में उन्होंने खुद इसमें बड़ी अनियमितता होने की बात लिखी है। गलत तरीके से बड़े पैमाने पर राशि आवंटन की बात रखी थी। इस पूरे प्रोजेक्ट पर ही सवालिया निशान लगाए गए थे। हालांकि इसके बाद प्रेम प्रकाश ने नौकरी छोड़ दी और यह मामला आडिट के आगे बढ़ा ही नहीं।
तीन किस्त में हुआ राशि का भुगतान
बैंक द्वारा तीन किश्त में पैसे का पूरा भुगतान किया गया। इसमें पहला भुगतान 4.32 करोड़, दूसरा भुगतान 1.31 करोड़ और तीसरा व अंतिम भुगतान 3.76 करोड़ की राशि दी गई। इस पूरे भुगतान में 17.6 लाख रुपए टीडीएस व कुछ राशि अन्य चीजों में काटी गई। लेकिन नियमानुसार 10 प्रतिशत की जो राशि बैंक को गांरंटी के रूप में कटौती करनी थी, वो नहीं की गई।

