प्रकृति को संवारे रखता है सरहुल:जमाल मुंडा
संवाददाता : दुलमी बाजार स्थित सरना स्थल में सरहुल पूजा के शुभ अवसर पर सरहुल महोत्सव सह मिलन समारोह का आयोजन किया गया।यह कार्यक्रम आदिवासी विकास परिषद के तत्वावधान में किया गया।।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अनुसूचित जन जाति सलाहकार परिषद झारखंड सरकार के जमाल मुंडा व विशिष्ठ अतिथि भारत मुंडा समाज रामगढ़ जिला अध्यक्ष नरेश मुंडा, दलित फाउड़ेशन बंगाल प्रभारी कृष्णा पासवान, मुखिया रमेश बेदिया, जनार्दन मानकी,प्रीति दीवान,झरना मांझी, दिलीप शर्मा,परमेश्वर पटेल,प्रदीप सिंह, उमेश मुंडा,अशोक महतो,चितरंजन महतो,पोखलाल बेदिया,रविन्द्र कुमारआदि कई गणमान्य शामिल थे ।अतिथियों का स्वागत बाजे गाजे साथ किया गया । तथा गमछा देकर समनित किया गया।अतिथियों ने फिता काटकर सरहुल सरना अखाड़ा का उद्घाटन किया।तत्पश्चात पाहन गुलाच मुंडा ने विधिवत पूजा अर्चना कर लोगों को सखुआ फूल व प्रसाद भेंट कर सरहुल की बधाई दिया।इस दौरान मुख्य अतिथि जमाल मुंडा ने कहा कि प्रकृति को सवारे रखता है सरहुल पूजा। खास कर सरहुल पूजा जल जंगल व जमीन प्रकृति की पूजा है ।यह पूजा आदिवासियों की मुख्य पूजा है। पाहन आदिवासी रीति रिवाज के साथ पूजा कर वर्षा पेड़ों में फल फूल,तथा जमीन में हरियाली की कामना करता है।उन्होंने पाहन पहनी संबंधित सरहुल गीत भी प्रस्तुत किया।वहीं विशिष्ठ अतिथि नरेश मुंडा ने कहा कि सरहुल (बाहा)एक महत्व पूर्ण पूजा है ।इसमें आदिवासियों की भाषा संस्कृति व सांस्कृतिक छिपा हुआ है ।इस पूजा में सिंगबोंगा की भी पूजा होती है ।सरहुल में एक दूसरे को सखुआ का फूल देकर प्रकृति की नए उत्सव की बधाई देते हैं ।सरहुल अखाड़ा में समाज सेवी प्रीति दीवान आदिवासी महिलाएं के साथ खूब नृत्य की ओर सभी को सरहुल की बधाई दी।सरहुल अखाड़ा में विरसा विकास दल रामगढ़, भैपुर , चटाक,दुलमी आदि दर्जनों गांवों से गीत व नृत्य मंडली ने भाग लिया तथा अपना कला का प्रदर्शन किया ।आयोजन समिति द्वारा साड़ी भेट कर समानित किया गया।वहीं लोगों ने भंडारे का भी लुप्त उठाया। मौके पर समिति के सचिव हीरालाल मुंडा,निर्मल मुंडा, राजेश मुंडा,बसंत करमाली,मनोज करमाली,कृष्णा करमाली,चुनीलाल करमाली,मनोज मुंडा,सुनील मुंडा,नागेन्द्र करमाली,विनोद करमाली,हरिनाथ रावण,भजू करमाली,कामेश्वर मुंडा,गोपाल करमाली,जगतू मुंडा,सुषमा मुंडा,उपासी मुंडा,शांति मुंडा,संजू मुंडा,सरुबला मुंडा,जीतू मनांकी,आशा महली,भुनेश्वर बेदिया आदि सैकड़ों लोग शामिल थे।

