लाह की खेती से लखपति बन रही है ग्रामीण महिला किसान
खूंटी:कल तक जिन महिलाओं का जीवन घर की चारदीवारी में कैद और खुद की पहचान से वंचित था, आज वही महिलाएँ वनोपज-उद्यमी के रूप में अपनी अलग पहचान बना रहीं हैं। ग्रामीण क्षेत्रों की ये महिला किसान लाह एवं लाह की खेती के ज़रिये बेहतर आजीविका की ओर अग्रसर हो रहीं हैं।
लाह की खेती से महिलाएं ना सिर्फ अपने गाँव में रहकर ही अच्छी आमदनी अर्जित कर रहीं हैं, बल्कि राज्य में लाह उत्पादन के आंकड़ों में भी बदलाव ला रहीं हैं। ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत झारखण्ड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी के ज़रिये सखी मंडल की ग्रामीण महिलाओं को लाह की वैज्ञानिक खेती से जोड़कर आधुनिक कृषि तकनीक के जरिए आमदनी बढ़ोतरी के लिए प्रयास किया जा रहा है।
रनिया प्रखण्ड अंतर्गत दाहु पंचायत से सेमरटोली गांव की जोसफिना कांडूलना दीदी जो 2016 में JSLPS के माध्यम से समूह में जुड़ी और 2020 में समूह के माध्यम से वैज्ञानिक रूप से लाह का खेती का प्रशिक्षण प्राप्त किया। उन्होंने लाह खेती करना शुरू किया। वर्तमान में दीदी अपने पेड़ के अलावे दूसरों के पेड़ों में भी लाह का खेती कर रही हैं। दीदी का लाह की दो खेती से सालाना आय लगभग 2 लाख तक होती है। लाह खेती के संबंध में उन्हें उचित जानकारी है और अब दीदी को आजीविका वन मित्र के रूप में चयनित किया गया है। दीदी के साथ 50 महिला किसान वैज्ञानिक रूप से लाह का खेती कर रही हैं। आजीविका वन मित्र से दीदी को साल में लगभग 15 से 18 हजार रुपए की आमदनी भी हो रही है। इस आय बढ़ौतरी से दीदी के बच्चों को भी पढ़ाने में सहयोग मिल रहा है। इस कार्य से दीदी बहुत प्रसन्न हैं।
इस पहल से जिले की ग्रामीण परिवारों को लाह की वैज्ञानिक खेती से जोड़ा गया है, जिनमें ज्यादातार अती गरीब एवं जंगल इलाकों के आस-पास रहने वाले ग्रामीण परिवार है।

