बैलेट पेपर से मतदान पर उठे सवाल, लंबी कतारों और अव्यवस्था की शिकायतें
रांची: झारखंड में संपन्न हुए नगर निकाय चुनाव के दौरान कई जिलों से मतदान प्रक्रिया को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। अनेक मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें देखी गईं, जिसके कारण कई मतदाताओं को घंटों इंतजार करना पड़ा। कुछ मतदाता बिना मतदान किए ही लौट गए, जबकि कई लोगों ने लंबी लाइन देखकर मतदान केंद्र तक पहुंचना उचित नहीं समझा।
मतदाताओं के एक वर्ग ने आरोप लगाया कि बैलेट पेपर से मतदान होने के कारण प्रक्रिया धीमी रही और व्यवस्थागत दबाव बढ़ गया। वहीं कुछ स्थानों से बोगस मतदान और पहचान सत्यापन में कथित ढिलाई की शिकायतें भी सामने आई हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
चुनाव के दौरान कुछ इलाकों में तनाव और विवाद की घटनाएं भी सामने आईं। स्थानीय स्तर पर झड़प, हंगामा और फायरिंग की घटनाओं में कुछ लोगों के घायल होने की सूचना मिली, जिससे चुनावी माहौल प्रभावित हुआ। इन घटनाओं के बाद सुरक्षा व्यवस्था और चुनाव संचालन को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
राजनीतिक दलों के कुछनेताओं और मतदाताओं का कहना है कि पूर्व में हुए विधानसभा और लोकसभा चुनाव इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के माध्यम से अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुए थे। उनका तर्क है कि कम जनसंख्या और मजबूत पुलिस तंत्र वाले देशों में बैलेट पेपर प्रणाली प्रभावी हो सकती है, लेकिन अधिक मतदाता संख्या वाले क्षेत्रों में इससे चुनौतियां बढ़ जाती हैं।
वहीं राज्य प्रशासन और चुनाव अधिकारियों ने दावा किया है कि चुनाव प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार संपन्न कराई गई। अब सभी की निगाहें 27 फरवरी को होने वाली मतगणना पर टिकी हैं, जब चुनाव परिणाम तस्वीर साफ करेंगे।



