कुरमी को आदिवासी सूची में शामिल करने का विरोध तेज, केंद्रीय सरना समिति ने निकाली बाइक रैली; हवाई सेवा रोकने की चेतावनी

रांची : झारखंड में कुरमी जाति को आदिवासी सूची में शामिल करने की मांग का विरोध लगातार उग्र होता जा रहा है। इसी कड़ी में रविवार को राजधानी रांची में केंद्रीय सरना समिति की ओर से आदिवासी अस्तित्व बचाओ बाइक रैली का आयोजन किया गया। समिति अध्यक्ष अजय तिर्की के नेतृत्व में निकली यह रैली मोरहाबादी मैदान से शुरू होकर मेन रोड, अल्बर्ट एक्का चौक होते हुए बापू वाटिका तक पहुँची। यहां राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर रैली का समापन किया गया।

रैली में सैकड़ों की संख्या में आदिवासी समाज के लोग शामिल हुए। बाइक पर सरना झंडा थामे युवाओं ने “आदिवासी एकता जिंदाबाद”, “आदिवासी की हकमारी बंद करो” जैसे नारों के साथ कुरमी समाज की मांगों का कड़ा विरोध किया। रैली में शामिल आदिवासी युवकों ने साफ कहा कि कुरमी को किसी भी कीमत पर आदिवासी का दर्जा नहीं दिया जाएगा। यदि ऐसा हुआ तो चरणबद्ध आंदोलन चलाकर सरकार को जवाब दिया जाएगा।

केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष अजय तिर्की ने कहा कि कुरमी कभी भी आदिवासी नहीं रहे हैं और न ही भविष्य में आदिवासी माने जाएंगे। उन्होंने इसे आदिवासी समाज के अस्तित्व की लड़ाई करार दिया। तिर्की ने आरोप लगाया कि कुरमी समाज केवल राजनीतिक हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए आदिवासी दर्जे की मांग कर रहा है, जबकि केंद्र सरकार ने 2015 में ही उनकी मांगों पर रोक लगा दी थी।

आदिवासी संगठनों के नेताओं प्रवीण कच्छप और लक्ष्मीनाथ मुंडा ने भी कहा कि कुरमी समुदाय द्वारा आदिवासी समाज के हक-अधिकारों पर डाका डाला जा रहा है, जिसे किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कुरमी समाज आंदोलन करेगा, तो आदिवासी संगठन मुंहतोड़ जवाब देंगे।

समिति ने यह भी स्पष्ट किया कि संविधान ने कुरमी समाज को जो अधिकार दिए हैं, उसी दायरे में उन्हें रहना चाहिए। आदिवासी बनने की कोशिश संविधान और समाज दोनों के खिलाफ है। रैली के दौरान नेताओं ने यहां तक ऐलान किया कि यदि कुरमी समाज की मांगों पर सरकार ने कोई सकारात्मक कदम उठाया, तो राज्य में हवाई सेवाएं रोक दी जाएंगी।

आदिवासियों ने स्पष्ट किया कि यह केवल सांकेतिक रैली है, जिसका मकसद आदिवासी समाज को चेताना और उनके हक की रक्षा करना है। यदि कुरमी को एसटी दर्जा देने की कोई कोशिश हुई, तो आंदोलन और तेज होगा। रैली में दर्जनों आदिवासी संगठन शामिल थे। मौके पर प्रमुख प्रतिभागियों में अजय तिर्की , रुपचंद केवट, बिगलाहा उरांव, राहुल उरांव, सुभानी तिग्गा, गैना कच्छप, अमित गाड़ी, बुड़ु धर्म गुरु एतवा उरांव उर्फ मनीष तिर्की, नवीन तिर्की, कैलाश तिर्की, मनोज उरांव, सुरज टोप्पो समेत सैकड़ों अन्य बुध्दिजीवी लोग शामिल थे।

रांची की इस रैली ने साफ संकेत दिया है कि कुरमी जाति को आदिवासी सूची में शामिल करने की राह आसान नहीं होगी। आने वाले दिनों में यह आंदोलन और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

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