प्रकृति पर्व सरहुल धूमधाम से मनाया गया,अलबर्ट एक्का चौक पर विभिन्न संगठनों ने लगाया सेवा शिविर
रांची: प्रकृति का पर्व सरहुल पूरे झारखंड में धूमधाम से मनाया गया। राजधानी रांची के अलबर्ट एक्का चौक पर मुख्य आकर्षण का स्थल रहा, जहां अलग अलग सरना समिति और विभिन्न राजनीति संगठनों द्वारा सेवा शिविर लगाया गया था।

सेवा शिविर में चना,गुड और शर्बत दिया गया।युवा राजद अध्यक्ष रंजन कुमार यादव,प्रवक्ता अनिता यादव,गौरीशंकर यादव सहित कई राजद नेताओं ने सेवा शिविर में श्रद्धालुओं को चना,गुड और शर्बत दिया।
अलबर्ट एक्का चौक पर जिला प्रशासन ने भी सेवा शिविर लगाया था। वहीं मंत्री चंपई सोरेन,भाजपा विधायक सीपी सिंह,रमेश सिंह सहित लोगों ने शोभायात्रा में शामिल लोगों का स्वागत किया।
सरहुल आदिवासियों का प्रमुख त्योहार माना जाता है. इस दिन आदिवासी समुदाय के लोग तालाब से मछली और केकड़ा पकड़ने का काम करते हैं. सरहुल के पहले दिन मछली के जल से अभिषेक किया जाता है और उस जल को अभिषेक किए गए जल को घर में छिड़का जाता है. दूसरे दिन उपवास रखा जाता है. तीसरे दिन पाहन उपवास रखते हैं. वही गांव के पुजारी बताते हैं कि इस सदियों से चली आ रही परंपरा को। आदिवासी समाज धार्मिक नियम धर्म से निभाते आ रहे हैं. आदिवासी जंगलों से जुड़े होते हैं. और प्राकृति से काफी नजदीक होते हैं. सरहुल के दिन से आदिवासी समाज कृषि का कार्य शुरू करते हैं. इस दिन से ही गेहू की नई फसलों की कटाई का काम शुरू किया जाता है. इस दिन गांव के पुजारी जिसे पाहन कहा जाता है, वो भविष्यवाणी करते हैं कि इस साल अकाल पड़ेगा या अच्छी बारिश होगी. परंपरा है कि पाहन मिट्टी के तीन बर्तन लेते हैं. फिर इन बर्तनों में ताजा पानी भर दिया जाता है.

