बिजली संकटः राज्य के निजी और सरकारी उपक्रमों के पावर प्लांटो को हर दिन चाहिए 43000 टन कोयला
रांचीः झारखंड में भीषण गर्मी के साथ बिजली रानी भी रूठ गई है। बिजली संकट ने झारखंड वासियों को झकझोर कर रख दिया है। इसकी वजह बताई जा रही है देश भर में कोयले की संकट। थर्मल पावर प्लांट के लिए कोयला जरूरी है। जहां तक झारखंड की बात है तो राज्य में स्थापित पावर प्लांटों से फूल लोग बिजली उत्पादन के लिए प्रतिदिन 43000 टन कोयले की जरूरत है। लेकिन इतना कोयला नहीं मिल पा रहा है। कम उत्पादन होने की वजह से अन्य स्त्रोतों से बिजली ली जा रही है। एक मेगावाट बिजली उत्पादन के लिए एक घंटा में एक टन कोयले की जरूरत होती है।
बिजली उत्पादन के लिए जेड-8 और जेड-9 श्रेणी के कोयले का होता है उपयोग
बिजली उत्पादन के लिए जेड 8 और जेड 9 श्रेणी के कोयले का उपयोग होता है। इसका आयात भी किया जाता है। वहीं सरकारी उपक्रम के एक मात्र पावर प्लांट टीवीएनल को हर दिन 7000 टन कोयले की जरूरत है। डीवीसी को हर दिन 24000 टन, आधुनिक पावर को प्रतिदिन 10 हजार टन और इंलैंड पावर को प्रति दिन दो हजार टन कोयले की जरूरत है।
टीवीएनएल हर दिन खरीदता है 32 करोड़ का कोयला
टीवीएनएल की दोनों यूनिटों को चलाने के लिए हर दिन 32 करोड़ रुपए की कोयले की खरीद की जाती है। दोनों यूनिटों को चलाने के लिये हर माह 1.5 लाख टन कोयले की जरूरत है। एक दिन में 7000 टन होती है कोयले की जरूरत है। टीवीएनएल में एक यूनिट बिजली उत्पादन में 700 से 800 ग्राम कोयले की जरूरत होती है। एक यूनिट बिजली उत्पादन में 3.60 रुपये प्रति यूनिट खर्च आता है। इसके अलावा टीवीएनएल में प्रतिमाह डीजल पर 3.5 करोड़ रुपए खर्च किया जाता है। मेनटेनेंश में दो से ढ़ाई करोड़ रुपए खर्च होता है। कर्मचारिटों और अधिकारियों के वेतन में हर महीने छह करोड़ रुपए का भुगतान होता है। टीवीएनएल से बिजली वितरण निगम हर दिन टीवीएनएल से लगभग ढ़ाई करोड़ की बिजली खरीदता है।

