लातेहार में JE मनीष कुमार की प्रतिनियुक्ति पर संग्राम के आसार!

लातेहार : लातेहार जिले में कनीय अभियंता मनीष कुमार की आईटीडीए में दोबारा प्रतिनियुक्ति को लेकर मामला गरमाने लगा है। जिला परिषद सदस्य विनोद उरांव ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए उपायुक्त संदीप कुमार को आवेदन सौंपा है। उन्होंने अभियंता को आईटीडीए में दोबारा प्रतिनियुक्त नहीं करने की मांग के साथ-साथ बारियातू, हेरहंज और चंदवा प्रखंड में उनके कार्यकाल के दौरान संचालित योजनाओं की जांच कराने तथा उनकी संपत्ति की पड़ताल करने का भी आग्रह किया है।जिला परिषद सदस्य की ओर से उठाए गए इस मुद्दे ने सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, प्रशासनिक निर्णयों और जवाबदेही को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। विनोद उरांव ने स्पष्ट किया है कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि किसी स्तर पर अनियमितता प्रमाणित होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने मांगों पर कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में आंदोलन करने की चेतावनी भी दी है।
विनोद उरांव के आवेदन के अनुसार, कनीय अभियंता मनीष कुमार का मूल विभाग लघु सिंचाई प्रमंडल, लातेहार है। इसके बावजूद वे लंबे समय से आईटीडीए में प्रतिनियुक्त रहे हैं। जिला परिषद सदस्य ने बताया कि तत्कालीन उपायुक्त उत्कर्ष गुप्ता ने 14 अगस्त 2025 को कार्यालय ज्ञापांक 380 के माध्यम से उनकी प्रतिनियुक्ति समाप्त की थी। उनके अनुसार, लगभग दो महीने के भीतर अभियंता को दोबारा आईटीडीए में प्रतिनियुक्त कर दिया गया।आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि वर्तमान उपायुक्त संदीप कुमार ने 7 सितंबर 2026 को ज्ञापांक 291 के माध्यम से प्रतिनियुक्ति समाप्त करने का आदेश जारी किया था। इसके बावजूद दोबारा प्रतिनियुक्ति की संभावना को देखते हुए जिला परिषद सदस्य ने प्रशासन से इस पर रोक लगाने की मांग की है।
जिला परिषद सदस्य ने बारियातू, हेरहंज और चंदवा प्रखंड में अभियंता के कार्यकाल के दौरान संचालित योजनाओं की जांच कराने का अनुरोध किया है। उन्होंने आवेदन में आरोप लगाया है कि आईटीडीए में प्रतिनियुक्ति के दौरान कल्याण विभाग की कई योजनाओं में अनियमितताएं बरती गईं।विनोद उरांव ने कुछ योजनाओं में बिना काम कराए राशि की निकासी करने और पुरानी योजनाओं के कार्यों को दिखाकर भुगतान लेने के आरोप भी लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।उन्होंने मांग की है कि संबंधित योजनाओं के स्वीकृति अभिलेख, प्राक्कलन, मापी पुस्तिका, भुगतान विवरण और स्थल पर कराए गए कार्यों की जांच की जाए। इससे योजनाओं पर खर्च हुई राशि और वास्तविक कार्यों की स्थिति का मिलान हो सकेगा तथा किसी भी अनियमितता की स्थिति में जिम्मेदारी निर्धारित की जा सकेगी।
विनोद उरांव ने संबंधित अभियंता की संपत्ति की जांच कराने का भी आग्रह किया है। उनका कहना है कि मामले की निष्पक्ष पड़ताल जरूरी है, ताकि आरोपों की सच्चाई सामने आ सके।सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए शिकायतों की निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण है। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता प्रमाणित होती है, तो संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच के तथ्यों के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए।
जिला परिषद सदस्य विनोद उरांव ने उपायुक्त संदीप कुमार से पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती है, तो वे आंदोलन करने को बाध्य होंगे।

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