झारखंड के महानायक शिबू सोरेन के स्वास्थ्य में सुधार के लिए मंदिरों-मस्जिदों में हो रही है प्रार्थना
यूं ही नहीं किसी को दिशुम गुरु का पद मिल जाता है,यूं ही नहीं कोई व्यक्ति झारखंड में आदिवासियों के बाबा बन जाते हैं। यूं ही नहीं एक आवाज से सभी आदिवासी एकजुटता हो जाते हैं,कुछ तो अलग बात हैं इनमें.. जी हां यह महान व्यक्ति अलग राज्य झारखंड आंदोलन के महानायक कहे जाने वाले शिबू सोरेन हैं। वर्तमान समय में वे जिंदगी और मौत से लड़ रहे हैं। वे दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती है और उनको ब्रेन स्ट्रोक आया है। इसमें उनके शरीर का एक भाग काम करना बंद कर दिया है।

शिव चरण मांझी से बना शिबू सोरेन एक गरीब परिवार के आते हैं और उनके पिता खेती का काम करते थे। उनके पिताजी चाहते थे कि उनका बेटा शिबू सोरेन भी खेती करे। लेकिन शिबू सोरेन को खेतीबाड़ी में मन ही नहीं लगता था। छात्र जीवन से ही उनका राजनीति में अधिक रुचि रहा है। साल 1972 में ‘सोनोत संताल’ और विनोद बिहारी महतो की अगुवाई वाले सामाजिक संगठन ‘शिवाजी समाज’ का विलय हुआ और झामुमो की स्थापना हुई। इसमें ट्रेड यूनियन लीडर ए.के. राय की महत्वपूर्ण भूमिका रही। झारखंड अलग राज्य के आंदोलन को सड़क से लेकर सदन तक पहुंचने में अपनी महती भूमिका शिबू सोरेन ने अदा की है। आज दिशुम गुरु शिबू सोरेन का नाम झारखंड आंदोलनकारी के रूप में चिन्हित होना सभी झारखंड आंदोलनकारियों के लिए गौरव की बात है।
शिबू सोरेन 1980में पहली बार लोकसभा चुनाव जीते। इसके बाद वे 1986,1991,1996 में चुनाव जीते। 2004 में वे दुमका से सांसद चुने गए। वर्तमान में वे राज्यसभा सांसद हैं। उनका पुश्तैनी घर रामगढ़ जिले के नेमरा में है।
शिबू सोरेन पिछले कई महीने से बीमार चल रहे हैं। उनको ठीक से याद भी नहीं रहता था। यही कारण है कि इसी साल हुए पार्टी की दो दिवसीय केन्द्रीय सम्मलेन में पार्टी के केन्द्रीय अध्यक्ष पद पर हेमंत सोरेन को सर्व सम्मति से चुना गया। जबकि इससे पहले केन्द्रीय अध्यक्ष पद पर शिबू सोरेन थे।
वहीं अलग राज्य झारखंड आंदोलन के नेता पुष्कर महतो ने कहा कि दिशुम गुरु के कारण ही आज झारखंड अलग राज्य गठन हो पाया है। आदिवासियों के सबसे बड़े नेता के रूप में दिशुम गुरु को ही जाना जाता है। इनके बाद हेमंत सोरेन का नाम आता है । हेमंत सोरेन ने दिशुम गुरु शिबू सोरेन के सिद्धांतों पर चल कर पार्टी को इतनी ऊंचाइयों पर ले जाने का काम किया है।
उन्होंने कहा कि शिबू सोरेन को झारखंड सरकार गजट में नोटिफिकेशन कर समारोहपूर्वक सम्मानित किया जाना चाहिए।
झामुमो नेता राहुल केशरी ने कहा कि झारखंड हित के शिबू सोरेन हमेशा मुखर रहते हैं। उन्होंने झारखंड में अबुआ राज का सपना देखा था। अलग राज्य झारखंड बनाने में सबसे बड़ा योगदान शिबू सोरेन का है। उन्होंने हजारों आंदोलन किया। रात –रात भर पैदल चले, पूरे झारखंड में भ्रमण किया, भूखे पेट रहे। सभी जाति,धर्म और समुदाय के लोगों का वे सम्मान करते हैं।
उनके जल्दी स्वस्थ्य होने की पूरे झारखंड के लोग कर रहे हैं।



