पोक्सो एक्ट के आरोपी आकाश मुंडा रिहा,न्यायिक प्रक्रिया में नया मोड़, परिवार ने जताई खुशी

बोकारो-  बोकारो के विशेष न्यायाधीश सह अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश  दिवेश कुमार त्रिपाठी की अदालत ने  पोक्सो एक्ट (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम) के तहत दायर मामले पोक्सो 45/2024 में विचारण के पश्चात साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। यह फैसला पोक्सो एक्ट के  विशेष कोर्ट  ने सुनाया, जिसमें मुंडा के वरीय वकील  रणजीत गिरि द्वारा पेश किए गए तर्कों को सही ठहराते हुए रिहा करने का आदेश दिया। आकाश मुंडा शिक्षक पर आरोप था कि एक नाबालिक लड़की को भागने का आरोप लगा था। घटना अप्रैल 2024 की है, जब बोकारो के एक आवासीय इलाके में एक नाबालिक  लड़की ने आकाश मुंडा पर पोक्सो एक्ट की धारा 8 और 12 एवं 363/366ए आई पी सी के तहत सेक्टर 12  थाना कांड संख्या 48/24 शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस ने तुरंत मुंडा को गिरफ्तार कर लिया था और मामला विशेष अदालत में विचाराधीन था। जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य जुटाए थे, लेकिन मुंडा के बचाव पक्ष के वकील रणजीत गिरि ने दावा किया कि मामला बनावटी था और भयादोहन करने के नियत से किया गया था। बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि  न्यायिक प्रक्रिया में निर्दोष को सजा नहीं दी जा सकती। साक्ष्यों की समीक्षा के बाद  रिहा कर दिया गया।

इस फैसले के बाद आकाश मुंडा के परिवार ने खुशी जाहिर की। उनके भाई महेश मुंडा ने कहा, हमारा भाई निर्दोष है। यह फैसला न्याय की जीत है।

वरीय वकील रंजीत गिरी ने बताया कि  पोक्सो एक्ट 2012 में लागू हुआ था, जो नाबालिगों के खिलाफ यौन अपराधों को रोकने के लिए बनाया गया। इस कानून के तहत अपराधों की सजा कड़ी है, लेकिन  यदि साक्ष्य अपर्याप्त हों या आरोपी निर्दोष साबित हो, तो रिहाई संभव है।

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