MMDR संशोधन राज्य और राष्ट्रहित में, झामुमो-कांग्रेस फैला रहे भ्रम : रघुवर दास

रांची : झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने MMDR (खान एवं खनिज विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम-2026 को राज्य और राष्ट्रहित में बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि झामुमो और कांग्रेस कानून की गलत व्याख्या कर जनता के बीच भ्रम फैला रहे हैं। भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में उन्होंने कहा कि संशोधन से खनिज संपदा का बेहतर उपयोग, वैध खनन में पारदर्शिता और राज्य में निवेश व रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।
रघुवर दास ने झामुमो-कांग्रेस पर अवैध खनन को संरक्षण देने का आरोप लगाते हुए कहा कि धनबाद, बोकारो, चतरा, हजारीबाग, साहिबगंज, दुमका और शिकारीपाड़ा सहित कई क्षेत्रों में कोयला, बालू और पत्थर के सिंडिकेट सक्रिय हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ‘जल, जंगल, जमीन’ के नाम पर सत्ता में आई, लेकिन प्राकृतिक संसाधनों को कथित तौर पर सिंडिकेट के हवाले कर दिया।
उन्होंने कहा कि बहस केवल 11 हजार करोड़ रुपये के सेस तक सीमित नहीं होनी चाहिए। खनन क्षेत्र के कुल टैक्स और वैधानिक भुगतान का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा राज्यों को मिलता है। उन्होंने कहा कि 2015 में केंद्र सरकार ने खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए DMFT की व्यवस्था की थी, जिसका लाभ स्थानीय लोगों तक पहुंचना चाहिए।
पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार पर खनन ब्लॉकों को चालू नहीं कराने का आरोप लगाया। उनके मुताबिक 34 स्वीकृत कोल ब्लॉकों में केवल चार चालू हो पाए हैं। लौह अयस्क की 15 में से छह और बॉक्साइट की 37 में से 17 खदानें ही संचालित हैं। उन्होंने कहा कि खदानें चालू होने से राज्य को राजस्व और युवाओं को रोजगार मिल सकता है।
रघुवर दास ने DMFT फंड के उपयोग पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि बड़ी राशि खर्च नहीं हो पाई है और कई योजनाएं ठप हैं। उन्होंने कहा कि वैध खनन और पारदर्शी सप्लाई चेन को मजबूत करने से अवैध खनन पर रोक लगेगी तथा राज्य को रॉयल्टी, रोजगार और औद्योगिक गतिविधियों के रूप में अधिक लाभ मिलेगा। प्रेसवार्ता में योगेंद्र प्रताप सिंह और केके गुप्ता भी मौजूद रहे।

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