मैथिली भाषा को नियोजन नीति में शामिल करने की मांग को लेकर सीएम हेमंत सोरेन को सौंपा ज्ञापन
रांची: झारखंड मैथिली भाषा संघर्ष समिति के तत्वाधान में शुक्रवार को जमशेदपुर एवं रांची की प्रमुख मैथिली संस्था का एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल राज्य में द्वितीय राजभाषा का स्थान प्राप्त मैथिली भाषा को झारखंड के नियोजन नीति में शामिल करने के अपने मांग को लेकर ग्रामीण विकास- कार्य सह पंचायती राज विभाग की मंत्री दीपिका पांडेय सिंह को ज्ञापन सौंपा। समिति के संयोजक अमरनाथ झा ने मंत्री के समक्ष राज्य में मैथिली भाषा की स्थिति की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि मैथिली को नियोजन नीति में शामिल करने की मांग राज्य के प्रमुख जिला जिला, जमशेदपुर, बोकारो, धनबाद के साथ राज्य के अन्य जिलों में निवास कर रहे 20 लाख से भी ज्यादा मैथिली भाषा- भाषियों के सम्मान एवं अस्मिता से जुड़ा हैं। संयुक्त बिहार राज्य काल में हुए भाषा सर्वेक्षण के अनुसार संपूर्ण संथाल परगना प्रमंडल मैथिली भाषाई क्षेत्र रहा।ज्ञातव्य हो की वर्तमान में राज्य के नियोजन नीति में राज्य में 12 एवं जिले में 15 क्षेत्रीय एवं जन- जातीय भाषा को स्थान प्राप्त है। जिसमें मैथिली जैसी पौराणिक भाषा जिसकी अपनी लिपि हैं और अति- समृध साहित्य हैं, को स्थान नहीं मिला जो मैथिली के लिए ना सिर्फ क्षोभ का कारण हैं बल्कि आने वाले पीढ़ियों के लिए भी भेद- भाव का कारण बनेगा ।
प्रतिनिधिमंडल के अनुसार मंत्री ने सूक्ष्मता से विषय को सुना- समझा और अपने स्तर से मांग को पुरा करवाने के प्रयास का आश्वासन भी दिया। इस क्रम में प्रतिनिधिमंडल के विशेष आग्रह पर मंत्री ने प्रतिनिधिमंडल सदस्यों को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से भेट भी करवाया । सीएम ने मांग पूरी करने का आश्वासन दिया है।इस मौके पर प्रतिनिधिमंडल में अनूप मिश्रा (ज्योति) अध्यक्ष, विद्यापति परिषद बगबेड़ा , जमशेदपुर, पंकज कुमार झा, प्रदेश सचिव, अंतर्राष्ट्रीय मैथिली परिषद, झारखण्ड, मिथिला सांस्कृतिक परिषद के अध्यक्ष मोहन ठाकुर, महासचिव धर्मेश झा (लड्डु), उपाध्यक्ष कैलाश झा, कार्यकरी सदस्य दिलीप झा, अंतर्राष्ट्रीय मैथिली परिषद सरायकेला के अध्यक्ष हंसराज जैन एवं महासचिव राजीव रंजन झा, राजकुमार मिश्र, झारखण्ड मैथिली मंच, रांची आदि मौजूद थे।



