राजस्थान से धरा गया 47 लाख की डिजिटल अरेस्ट ठगी का मास्टरमाइंडभागलपुर साइबर थाना की बड़ी कार्रवाई
भागलपुर। भागलपुर साइबर थाना ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 47 लाख रुपये की ठगी करने वाले एक बड़े साइबर अपराधी को राजस्थान से गिरफ्तार कर महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। यह मामला उन जटिल साइबर अपराधों में से एक माना जा रहा है, जिसमें पीड़ित को मानसिक दबाव, धमकी और फर्जी डिजिटल प्रक्रियाओं का सहारा लेकर खाते से लाखों रुपये निकलवा लिए जाते हैं।
कैसे हुआ मामला दर्ज?
21 जून 2024 को डॉ. निर्मला कुमारी, पति कृष्णनंदन, निवासी – गोदावरी अपार्टमेंट, विश्वविद्यालय कैंपस (भागलपुर) ने साइबर थाना को लिखित आवेदन दिया। आवेदन में बताया गया कि उन्हें ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर अपराधियों ने भयभीत किया और धमकियों के जरिये उनके खाते से 47 लाख रुपये विभिन्न खातों में ट्रांसफर करा लिये।मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर थाना, भागलपुर ने कांड संख्या 36/24 दर्ज करते हुए जांच शुरू की।
वरीय पुलिस अधीक्षक, भागलपुर के निर्देश पर पुलिस अधीक्षक (नगर) की निगरानी, पुलिस उपाधीक्षक (साइबर) सह थाना प्रभारी के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई। टीम ने तकनीकी विश्लेषण, मनी ट्रेल ट्रैकिंग और इंटरसेप्टेड डिजिटल डेटा की मदद से पूरे मॉड्यूल पर निगरानी रखनी शुरू की।
राजस्थान में दबिश, होटल से पकड़ा गया मास्टरमाइंड
गहन अनुसंधान के बाद पुलिस को ठोस सूचना मिली कि इस कांड का प्रमुख अभियुक्त राकेश पटेल, पिता – रावत राम, निवासी लुनाबास खारा, भंवर, जोधपुर (राजस्थान) प्रताप नगर थाना क्षेत्र स्थित एक होटल में छिपा हुआ है। टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए होटल में छापेमारी की और राकेश पटेल को विधिवत गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में सामने आया बड़ा नेटवर्क
प्रारंभिक पूछताछ में खुलासा हुआ कि – राकेश पटेल पंजाब, दिल्ली, हरियाणा सहित कई राज्यों में सक्रिय साइबर गिरोह से जुड़ा है। यह नेटवर्क डिजिटल अरेस्ट, वर्चुअल पुलिस कॉल, फेक वीडियो कॉलिंग और सरकारी एजेंसियों का भय दिखाकर लोगों को आर्थिक रूप से ठगता है। गिरोह हाई-टेक तकनीकों और VOIP आधारित कॉलिंग सिस्टम का उपयोग करता है। अभियुक्त के मोबाइल फोन और तकनीकी उपकरणों का डिजिटल फॉरेंसिक विश्लेषण जारी है।
साथ ही विभिन्न बैंक खातों, लेनदेन और अन्य सहयोगियों की पहचान पर अनुसंधान तेज कर दिया गया है।



