आजादी के जंग में नवचेतना के सूत्रधार शहीद सरदार गया मुंडा
खूंटी: अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ झारखंड क्षेत्र में उलगुलान का बिगुल फूंकनेवाले अमर शहीद बिरसा मुंडा के एक मुख्य सहयोगी थे- शहीद गया मुंडा। इनके पूरे परिवार को आजादी की लड़ाई में कुर्बानी के लिए आज भी खूंटी जिला क्षेत्र में याद किया जाता है। गया मुंडा के सहयोगी उन्हें सरदार गया के नाम से पुकारते थे।
गया मुंड़ा के संबंध में ‘‘ सामंतवाद, सम्राराज्यवाद कोवाअ, शोषण रे, गुलाम रे, काबु तईनम मेनेया मुंडा गया। हातु दिसुम, अबुअः, दिसुम चलाओयाबु, शोषण रे, गुलाम रे, काबु तईनम मेनेया मुंडा गया। ओते आड़ी अबुअः, कागज, कलम तकोवाअ शोषण रे, गुलाम रे काबु ………….. मुंडा गया‘‘ वीर रस के गीत गाकर क्षेत्र के लोग उन्हें नमन करते हैं।
कहा जाता है कि गया मुंडा आदिवासी समाज के पारंपरिक हथियार तीर-धनुष, कुल्हाड़ी चलाने में निपुण थे। भगवान बिरसा मुंडा की अंगे्रजों के साथ लड़ाई के दौरान गया मुंडा ने अपनी पत्नी माकी मुंडा, दो बेटे सांडे व जयमसीह एवं तीन पुत्रियां टींगी, लेेंबू व नागी के सहयोग से दुश्मनों के दांत खट्टे कर रखे थे।
शहीद गया मंडा के शहादत दिवस 06 जनवरी के अवसर पर उनकी जन्मस्थली खूंटी जिला अंतर्गत मुरहू प्रखंड के ग्राम एटकेडीह, कुदा में प्रत्येक वर्ष शहीद मेला का आयोजन किया जाता है। वर्ष 2019 में जिला प्रशासन द्वारा अमर शहीद गया मुंडा की पुण्यतिथि के मौके पर उनकी आदमकद प्रतिमा एटकेडीह ग्राम में स्थापित की गई, जहां उनकी स्मृति में ग्रामीणों द्वारा पत्थरगड़ी की गई है।

