‘होली-ईद से पहले पेंशन पर ताला! टीएमबीयू के 2663 पेंशनरों का फूटा गुस्सा, धरना देकर मांगा हक’
भागलपुर। टीएमबीयू के पेंशनरों का आक्रोश उस समय खुलकर सामने आ गया जब फरवरी 2026 की पेंशन रोक दिए जाने के विरोध में पेंशनर संघर्ष मंच के सदस्यों ने प्रो. बिहारी लाल चौधरी की अध्यक्षता में धरना-प्रदर्शन किया। पेंशनरों का कहना है कि बिहार के सभी विश्वविद्यालयों में केवल टीएमबीयू के पेंशनरों की पेंशन रोकी गई है, जिससे उनमें भारी नाराजगी है।
धरना दे रहे पेंशनरों ने सवाल उठाया कि जब होली और ईद जैसे महत्वपूर्ण त्योहार सामने हैं, तब टीएमबीयू के 2663 परिवारों को भगवान भरोसे छोड़कर जिम्मेदार पदाधिकारियों ने अपना वेतन कैसे ले लिया? पेंशनरों के अनुसार राज्य सरकार का कहना है कि विश्वविद्यालय के पास पेंशन मद की बची हुई राशि से भुगतान किया जा सकता है, जबकि विश्वविद्यालय प्रशासन का तर्क है कि सरकार से अनुदान नहीं मिलने के कारण भुगतान संभव नहीं है।
पेंशनर संघर्ष मंच का दावा है कि हर माह पेंशन और अन्य सेवांत लाभ के लिए सरकार लगभग 19.67 करोड़ रुपये देती है, जबकि वास्तविक खर्च करीब 17 करोड़ रुपये ही होता है। इस प्रकार हर माह लगभग ढाई करोड़ रुपये की बचत होती है। मंच का आरोप है कि विश्वविद्यालय इस बची हुई राशि को फिक्स्ड डिपॉजिट में रखकर ब्याज कमाता है, जबकि पेंशनरों का भुगतान रोक दिया जाता है।
मंच के पदाधिकारियों ने बताया कि 14 अक्टूबर 2025 को ही कुलपति को ज्ञापन देकर आगाह किया गया था कि पिछले वर्ष की तरह इस बार भी दिसंबर से फरवरी तक पेंशन रुकने की आशंका है। इसके बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन ने समय रहते कोई पहल नहीं की, जिसका खामियाजा निर्दोष वरिष्ठ नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है।
दोपहर बाद कुलसचिव प्रो. रामाशीष पुर्वे धरना स्थल पर पहुंचे और पेंशनरों से वार्ता की। उन्होंने संबंधित प्राधिकृत अधिकारियों से फोन पर बात कर आश्वासन दिया कि अगले सप्ताह के भीतर फरवरी माह की पेंशन का भुगतान कर दिया जाएगा।
मंच के सहसंयोजक अमरेंद्र कुमार झा ने कुलसचिव को 46 लंबित मामलों की सूची सौंपी, जिनमें से कई संचिकाएं लापता बताई जा रही हैं। इस पर कुलसचिव प्रो. पुर्वे ने आश्वासन दिया कि लापता फाइलों को निकलवाया जाएगा और सोमवार को मंच के शिष्टमंडल के साथ बैठकर मामलों की प्रगति की समीक्षा की जाएगी।आज के धरना-प्रदर्शन में लगभग चार दर्जन पेंशनर उपस्थित रहे।



