चुटुपालू घाटी सड़क दुर्घटना में मृतकों के प्रति नेता प्रतिपक्ष अमर कुमार बाउरी ने गहरा दुःख व्यक्त किया

रांची:नेता प्रतिपक्ष अमर कुमार बाउरी ने रामगढ़ के चुटुपालू घाटी में हुई भीषण सड़क दुर्घटना में मृत लोगों के प्रति गहरा दुःख व्यक्त किया है। नेता प्रतिपक्ष ने ईश्वर से दिवगंत आत्माओं को शांति प्रदान कर शोक संतप्त परिवारों को दुःख की विकट घड़ी को सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना की है।*

मात्र संवेदना संदेशों, छोटी मुआवज़ा राशि व सम्मेलन-विचार-विमर्श ही नहीं, बल्कि दुर्घटनाएं रोकने के उपायों पर अमल की कोई ठोस रूपरेखा बननी चाहिए !

आकड़ें 1: 80 फीसदी हादसों में 18 साल या इससे कम उम्र के किशोर, नौजवानों की मौत हुई है !

आकड़ें 2: झारखंड में 2021 के दौरान 4,728 सड़क दुर्घटनाओं में 3,513 लोगों की जान गई व 3,227 घायल हुए। वहीं 2022 में 5,174 सड़क दुर्घटनाओं में 3,898 लोगों की जान गई व 3,745 घायल हुए।


विडंबना यह है कि जब भी कोई बड़ा सड़क हादसा होता है, तो संवेदना जताकर या फिर मुआवजे की घोषणा करके कर्तव्य की इतिश्री कर ली जाती है। उन कारणों का निवारण मुश्किल से ही होता है, जिनके चलते हादसे होते हैं।

सड़क हादसों में मरने और घायल होने वाले अधिकतर लोग कामकाजी सदस्य होते हैं यानी परिवार की जिम्मेदारी उन पर ही होती है। उनके न रहने या फिर अपंग हो जाने के कारण पूरा परिवार प्रभावित होता है। कई बार तो वह गरीबी रेखा से नीचे चला जाता है।

झारखंड में कोरोना के बाद सड़क हादसों में लगातार इजाफा हुआ है। राज्य में 2021 के दौरान 4,728 सड़क दुर्घटनाओं में 3,513 लोगों की जान गई। जबकि 3,227 घायल हो गए। वहीं दूसरी ओर 2022 के दौरान राज्य भर में 5,174 सड़क दुर्घटनाएं हुई। इनमें 3,898 लोगों की मौत हो गई और 3,745 घायल हुए हैं. 2021 की तुलना में 2022 के दौरान सड़क दुर्घटनाएं 449 (9.50%) अधिक हुई। इसी प्रकार मौत के मामले 387 (11.02%) बढ़ गए. वहीं घायलों की संख्या भी 519 (16.08%) अधिक रिपोर्ट हुई हैं। परिवहन विभाग के अंतर्गत सड़क सुरक्षा की रिपोर्ट के मुताबिक 2022 के दौरान 45 फीसदी हादसों में दोपहिया वाहन शामिल थे। वहीं कार, जीप, वैन, टैक्सी से 13 प्रतिशत और ट्रक, लॉरी से 12 फीसदी सड़क हादसे रिपोर्ट किए गए हैं। इन दुर्घटनाओं के रिसर्च के आधार पर पाया गया है कि, करीब 80 फीसदी हादसों में 18 साल या इससे कम उम्र के किशोर, नौजवानों की मौत हुई है।

एक मां जो अपने बच्चों को 9 माह गर्भ में रखती है तथा 18 वर्ष सीने से लगाकर पाल पोश कर बड़ा करती है और एक पिता जो अच्छी शिक्षा एवं अच्छा भविष्य देने के लिए संघर्ष करता है, वही बच्चा अपने माता-पिता के त्याग को नजरअंदाज कर अपनी जीवन लीला समाप्त कर देता है और छोड़ जाता है तड़पते हुए माता-पिता को। इसके लिए जितने जिम्मेवार आज की पीढ़ी है उससे कहीं ज्यादा जिम्मेदार माता-पिता हैं जो अपने बच्चों पर नजर तक नहीं रखते कि उनका बच्चा घर से बाहर क्या करता है।

यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि सड़कों की दोषपूर्ण डिजाइन से मुक्ति मिले, क्योंकि अनेक हादसे सड़कों की खराब इंजीनियरिंग के कारण होते हैं। इसी तरह तमाम हादसे ट्रैफिक नियमों की अनदेखी और अकुशल-अनाड़ी ड्राइवरों के कारण होते हैं। एक और प्रमुख कारण है नशे में गाड़ी चलाना, ऐसे लोगों को चिन्हित करने की आवश्यकता है। साथ ही ड्राइविंग लाइसेंस के गाड़ी चलाने वाले, ओवर स्पीड करने वाले, लाल बत्ती जंप करने वाले, मोबाइल पर बात करते हुए वाहन चलाने वाले और गलत दिशा में वाहन चलाते पकड़े गए वैसे दोषियों को चिन्हित किया जाए और एक डेटाबेस का निर्माण हो।

मात्र संवेदना संदेशों, छोटी मुआवज़ा राशि व सम्मेलन-विचार-विमर्श ही नहीं, बल्कि उन उपायों पर अमल की कोई ठोस रूपरेखा भी बननी चाहिए, जो मार्ग दुर्घटनाओं को कम करने में सहायक बन सकें। यह इसलिए आवश्यक है, क्योंकि तमाम प्रयासों के बाद भी सड़क दुर्घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। इन दुर्घटनाओं में मरने और घायल होने वालों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है।

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