जानिए झारखंड में ट्रांसिमशन लाइन का सचः झारखंड में लचर ट्रांसमिशन लाइन, एनटीपीसी और पीजीसीआईएल के लाइन से ली जा रही बिजली, हर महीने 17 करोड़ का भुगतान

रांचीः झारखंड में बिजली की आपूर्ति सही तरीके से नहीं हो पाने की सबसे बड़ी वजह ट्रांसमिशन लाइन है। झारखंड राज्य संचरण निगम लिमिटेड ने कई प्रोजेक्ट को ठंढ़े बस्ते में डाल दिया। हाल ही में पतरातू में बन रहे पावर प्लांट से बिजली सप्लाई के लिए बनने वाले ट्रांसमिशन लाइन का टेंडर भी रद्द कर दिया। अब नई शर्तों के साथ फिर से टेंडर करने की तैयारी की जा रही है। हाल यह है कि ट्रांसमिशन लाइन नहीं होने की वजह से झारखंड में बिजली आपूर्ति के लिए एनटीपीसी और पीजीसीआइएल के ट्रांसमिशन लाइन का उपयोग किया जा रहा है। इन कंपनियों के ट्रांसमिशन लाइन का उपयोग करने पर हर माह लगभग 17 करोड़ रुपए का भुगतान भी किया जा रहा है। राज्य विद्युत नियामक आयोग ने दूसरे के लाइन से बिजली लेने के एवज में 28 से 30 पैसे प्रति यूनिट की दर तय की है। इस हिसाब से हर साल 204 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। यह राशि व्हीलिंग चार्ज के भुगतान की जाती है। . इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि टीम इंडिया के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धौनी की पत्नी ने भी ट्वीट कर कहा है कि राजधानी रांची के लोगों को बिजली की कटौती हर दिन झेलनी पड़ रही है. यह चार से पांच घंटे तक की होती है. बिजली कटौती का कोई कारण भी नहीं है. न तो मौसम खराब है और न ही कोई पर्व.
साल दर साल बढ़ रहा मेनटेनेंश और रिपेयर कॉस्ट
ट्रांसमिशन लाइन नहीं होने के कारण बिजली भी सरेंडर करनी पड़ती है। राजधानी रांची में अंडर ग्राउंड केबलिंग का काम पूरा नहीं हो पाया है। करार की मियाद भी पूरी हो गई है। वहीं बिजली खरीद और रिपेयर मेनटेनेंश का कॉस्ट बढ़ा है. 2016-17 में बिजली खरीद व रिपयेर-मेनटेनेंश में 6298 करोड़ रुपए, 2017-18 में 6253 करोड़ रुपए, 2018-19 में 6237 करोड़ रुपए खर्च किए गए. अब 13541 करोड़ रुपए बिजली खरीद व रिपेयर मेनटेनेंश में खर्च किए जा रहे हैं।
8109 करोड़ का प्रोजेक्ट भी शुरू नहीं
वर्ल्ड बैंक से 2311 करोड़ कर्ज लेकर 61 ट्रांसमिशन लाइन और ग्रिड सब स्टेशन बनाने की योजना बनाई गई । इसके अलावा पीपीपी मोड से 59 ग्रिड सब स्टेशन व ट्रांसमिशन लाइन बनेगी. इस प्रोजेक्ट में 4605 करोड़ का प्लान बना। यही नहीं राज्य योजना से 35 ग्रिड सब स्टेशन व ट्रांसमिशन लाइन 1193 करोड़ की लागत बनाने की योजना बनी। कुल 8109 करोड़ रुपये की योजना बनाई गई थी। लेकिन अब तक धरातल पर नहीं उतर पाई हैं। कई ट्रांसमिशन लाइन पर टेंडर का पेंच फंसा ही हुआ है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *