जेपीएससी छात्रों का आंदोलन 14वें दिन भी जारी, सरकार के बुलावे का इंतजार, अनशन पर बैठे कई छात्रों की बिगड़ी तबीयत
रांची : झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षा में कथित अनियमितताओं की सीबीआई जांच और अन्य मांगों को लेकर छात्रों का सत्याग्रह आंदोलन गुरुवार को 13वें दिन भी जारी रहा। आंदोलनकारी छात्र सरकार की ओर से वार्ता के लिए औपचारिक बुलावे का इंतजार कर रहे हैं। इस बीच अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे कई छात्रों की तबीयत बिगड़ने लगी है, जिससे धरना स्थल पर चिंता का माहौल है।
सरकार की ओर से वार्ता का प्रस्ताव भेजा जा चुका है। एसडीएम के माध्यम से छात्रों को इसकी सूचना दी गई है। आंदोलनकारियों ने मुख्यमंत्री आवास को 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की सूची भी भेज दी है। अब सभी की निगाहें मुख्यमंत्री आवास से मिलने वाले निमंत्रण पर टिकी हैं।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्रों से बातचीत के लिए चार मंत्रियों की एक समिति गठित की है। इस समिति में मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, चमरा लिंडा, राधाकृष्ण किशोर और संजय प्रसाद यादव शामिल हैं। हालांकि आंदोलनकारी छात्र स्पष्ट कर चुके हैं कि वे मंत्रियों के बजाय सीधे मुख्यमंत्री से बातचीत करना चाहते हैं। उनका कहना है कि उनकी प्रमुख मांग जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की सीबीआई जांच और अभ्यर्थियों को न्याय दिलाना है।
धरना स्थल पर पिछले कई दिनों से जारी भूख हड़ताल के कारण कुछ छात्रों की शारीरिक स्थिति कमजोर होती जा रही है। इसके बावजूद आंदोलनकारियों का मनोबल बना हुआ है। उन्हें लगातार सामाजिक संगठनों, आम लोगों और विभिन्न राज्यों से मिल रहे समर्थन से नई ऊर्जा मिल रही है।
आंदोलन स्थल पर छात्रों के लिए भोजन, नाश्ता, चाय, बिस्कुट, फल, दूध सहित अन्य आवश्यक वस्तुओं की व्यवस्था समाज के लोगों द्वारा की जा रही है। बड़ी संख्या में लोग आर्थिक और सामाजिक सहयोग देकर आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं।
गुरुवार को झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के विधायक जयराम महतो भी धरना स्थल पहुंचे। उन्होंने भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों से मुलाकात कर उनके आंदोलन का समर्थन करने का ऐलान किया। वहीं दिल्ली के चर्चित सामाजिक कार्यकर्ता जुनैद बिरयानी वाले भी रांची पहुंचे और छात्रों से मिलकर हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया।
इसके अलावा अधिवक्ता संघ ने भी आंदोलनरत छात्रों के समर्थन की घोषणा करते हुए कहा कि यदि छात्रों से जुड़े मामलों में कानूनी लड़ाई की आवश्यकता पड़ी तो अधिवक्ता निःशुल्क पैरवी करेंगे। देश के विभिन्न राज्यों से छात्र संगठन, सामाजिक कार्यकर्ता और नागरिक वीडियो कॉल तथा फोन के माध्यम से भी आंदोलनकारियों का मनोबल बढ़ा रहे हैं।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार और छात्रों के बीच वार्ता कब होती है और क्या इस बातचीत से लंबे समय से जारी आंदोलन का कोई सकारात्मक समाधान निकल पाता है।

