सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने में झारखण्ड काफी पीछे
रांची के होटल लीलैक में “सतत विकास लक्ष्य और झारखण्ड में इसकी स्थिती” विषय पर राज्य स्तरीय कंसल्टेशन का आयोजन किया गया I इस कंसल्टेशन का आयोजन लीड्स और ब्रेड फॉर द वर्ल्ड के संयुक्त तत्वाधान में किया गया. कार्यक्रम में झारखण्ड कई स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित थे I इसके अलावा राज्य के विभिन्न क्षेत्र से समुदाय के प्रतिनिधि जैसे वार्ड सदस्य, मुखिया और ग्राम प्रधानों की भी इस कार्यक्रम में उपस्थिति रही I
सतत विकास लक्ष्य (SDG) पर प्रकाश डालते हुए लीड्स के निदेशक ए.के.सिंह ने कहा कि सबके लिए समान, न्यायपूर्ण और सुरक्षित विश्व बनाने के लिए SDG एक सार्वभौमिक समझौता है जो कि तय किये हुए लक्ष्यों को 2030 तक प्राप्त करने की बात कहता है I SDG में कुल 17 लक्ष्य निर्धारित किये गए हैं I 2015 में हुए संयुक्त राष्ट्र महासभा के सम्मलेन में सतत विकास के लिए एजेंडा अपनाया गया और यह 2016 से प्रभाव में आया I SDG में सरकारों, स्वयंसेवी संस्थाओं, अधिकारीयों, समुदाय के लोगों आदि की जिम्मेवारी भी तय की गयी है I
लीड्स की राजप्रिया ने बतलाया कि SDG के 5 मुख्य आधार हैं- लोग, संसाधन, खुशहाली , शांति और साझेदारी I SDG लक्ष्य संख्या 1 से 4 तक के बारे में बतलाया जो कि हैं- गरीबी को समाप्त करना, खाद्य सुरक्षा और बेहतर पोषण मुहैया कराना. बेहतर स्वास्थ्य सुविधा, समावेशी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा I
लीड्स की निर्झरिणी रथ ने SDG के लक्ष्य 5 से 8 तक के बारे में बतलाया जो कि हैं- लैंगिक समानता, जल और स्वच्छता की उपलब्धता, सतत एवं स्वच्छ उर्जा, समावेशी आर्थिक विकास और रोजगार को बढ़ावा I
लीड्स के निदेशक ए.के.सिंह ने SDG के लक्ष्य 9 से 17 तक के बारे में बतलाया I
लीड्स के अमित कुमार ने SDG की लक्ष्यों की प्राप्ति के आधार पर झारखण्ड की स्थिती के बारे में नीति आयोग की 2020-21 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा की ज्यादातर लक्ष्यों को प्राप्त करने के मामले में झारखण्ड की स्थिती काफी पीछे है I लक्ष्य संख्या 1 और 2, जो कि गरीबी उन्मूलन और बेहतर खाद्य सुरक्षा के बारे में है उनमें सभी राज्यों में झारखण्ड का स्थान सबसे नीचे है I उसी प्रकार स्वास्थ्य और गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा के मामले में झारखण्ड का स्थान सभी राज्यों में क्रमशः 11 और 21 है I
यूनिसेफ की लक्ष्मी सक्सेना ने कहा कि SDG की लक्ष्य प्राप्ति के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार आदि से सम्बंधित सरकारी योजनओं का लाभ समुदाय के वंचित वर्ग तक पहुंचना काफी जरुरी है I इसके साथ साथ समुदाय को उनके अधिकारों के बार्रे में जागरूक करने के लिए स्वयंसेवी सँस्थाओं की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है I
सची जी, सचिव छोटानागपुर सांस्कृतिक संघ, ने अपने संबोधन में कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में माहवारी स्वच्छता और प्रजनन स्वास्थ्य के मामले में अभी भी ग्रामीण समुदाय में जागरूकता का काफी अभाव है जिसको लेकर आगे काम करने की जरुरत है I गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लक्ष्य को हासिल करने में कोरोना महामारी के चलते हम थोड़े पीछे रह गए हैं और अब प्राथमिकता के आधार पर इस पर भी काम करना होगा I
सतीश कर्ण, सचिव लोक प्रेरणा, ने कहा कि SDG के लक्ष्य प्राप्ति में स्वयंसेवी संस्थाओं की भूमिका काफी अहम् है I ऐसी संस्थाओं और स्वयं सेवकों को बढ़ावा दिए जाने की जरुरत है ताकि समुदाय को जागरूक करने और समाज के अंतिम वंचित व्यक्ति तक सुविधा पहुँचाने का काम सुनिश्चित हो सके I
सुधीर पाल, मंथन युवा मंच, ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि यदि हम स्थायी विकास चाहते हैं तो स्थानीय स्वशासन को बढ़ावा देना होगा और पंचायतों को सशक्त करना होगा I
मधुकर जी, वरिष्ठ पत्रकार, ने कहा कि सतत विकास के लिए यह जरुरी है कि सरकारें कल्याणकारी योजनाओं का आबंटित बजट सही तरीके से खर्च करें.
डॉ. हरीश्वर दयाल, डायरेक्टर सेंटर फॉर फिस्कल स्टडीज , झारखण्ड सरकार, ने कहा कि SDG के लक्ष्यों को पाने में भारत की स्थिती खुश करने वाली नहीं है I UN की 2022 की SDG रिपोर्ट के अनुसार 163 देशों की सूचि में भारत का स्थान 131 वां है जबकि हमारे पडोसी देश बांग्लादेश की स्थिती हमसे बेहतर है जो कि 104 वें स्थान पर है I

