चाईबासा सदर अस्पताल में एक बार फिर संक्रमित रक्त चढ़ाने का आरोप, एक ही परिवार के 3 लोग HIV पॉजिटिव
चाईबासा: सदर अस्पताल चाईबासा एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में है। 25 अक्टूबर 2025 को थैलेसीमिया से ग्रसित छह बच्चों के एचआईवी पॉजिटिव पाये जाने के बाद अब अस्पताल की लापरवाही से एक ही परिवार के तीन लोगों के एचआईवी संक्रमित होने का मामला सामने आया है। आरोप है कि सदर अस्पताल में प्रसव के दौरान चढ़ाए गये संक्रमित रक्त के कारण महिला, उसके पति और उनके बड़े बच्चे को एचआईवी संक्रमण हुआ। इस खुलासे ने सदर अस्पताल के ब्लड बैंक की कार्यप्रणाली पर फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिये हैं। मामला करीब तीन साल पुराना बताया जा रहा है, लेकिन इसका पता अब चला है, जिससे स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह मामला बेहद गंभीर है। फिलहाल झारखंड के स्वास्थ्य सचिव अजय कुमार ने पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दे दिये हैं।
पीड़ित परिवार के अनुसार, जनवरी 2023 में महिला का पहला प्रसव चाईबासा सदर अस्पताल में सी-सेक्शन के जरिए हुआ था। इस दौरान महिला को रक्त की आवश्यकता पड़ी, जिसके लिए सदर अस्पताल के ब्लड बैंक से खून उपलब्ध कराया गया। परिवार का आरोप है कि उसी दौरान महिला को एचआईवी संक्रमित रक्त चढ़ाया गया। उस समय संक्रमण का कोई लक्षण सामने नहीं आया, लेकिन जून 2025 में जब महिला दूसरी बार गर्भवती हुई, तब रूटीन मेडिकल जांच के दौरान वह एचआईवी पॉजिटिव पाई गई। इसके बाद पति ने भी जांच कराई, जिसमें वह भी एचआईवी पॉजिटिव पाया गया।
2 जनवरी 2026 को महिला के दूसरे बच्चे का जन्म जमशेदपुर में हुआ। इसी बीच जब उनका बड़ा बच्चा बीमार पड़ा और उसकी जांच कराई गई, तो वह भी एचआईवी पॉजिटिव पाया गया। इसके बाद परिवार की चिंता और भय और गहरा हो गया। दंपती ने शुरुआत में इस मामले को छिपाए रखा। महिला के पति का कहना है कि उन्हें समाज से अघोषित बहिष्कार का डर था और वे समझ नहीं पा रहे थे कि आगे क्या किया जाये। अब उन्हें इस बात की आशंका सता रही है कि कहीं उनका दूसरा बच्चा भी इस जानलेवा बीमारी से संक्रमित न हो जाये।
गौरतलब है कि 25 अक्टूबर 2025 को चाईबासा सदर अस्पताल में थैलेसीमिया से ग्रसित छह बच्चों के एचआईवी पॉजिटिव होने की पुष्टि हुई थी। उस मामले में मुख्यमंत्री के आदेश पर कार्रवाई करते हुए सिविल सर्जन डॉ. सुशांत कुमार माझी ने ब्लड बैंक के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. दिनेश चंद्र सेवयां को निलंबित कर दिया था, जबकि तकनीशियन मनोज कुमार को सेवामुक्त कर दिया गया था। प्रारंभिक जांच में अस्पताल प्रशासन की गंभीर लापरवाही सामने आई थी। यह मामला इतना संवेदनशील था कि हाईकोर्ट ने भी इस पर संज्ञान लिया था। बताया गया था कि थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को ब्लड बैंक से एचआईवी संक्रमित खून चढ़ा दिया गया था।
चाईबासा सदर अस्पताल का ब्लड बैंक पूरे पश्चिमी सिंहभूम जिले में रक्त आपूर्ति का एकमात्र सरकारी स्रोत है। ऐसे में बार-बार सामने आ रहे एचआईवी संक्रमण के मामलों ने ब्लड बैंक की जांच प्रक्रिया और निगरानी व्यवस्था पर गहरे सवाल खड़े कर दिये हैं। पीड़ित महिला के पति ने बताया कि जून 2025 में उनकी पत्नी दूसरी बार गर्भवती हुई थी, यानी सरकारी अस्पताल को थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों के संक्रमित होने की जानकारी मिलने से सिर्फ दो महीने पहले। दूसरी गर्भावस्था के दौरान रूटीन जांच में पत्नी के एचआईवी पॉजिटिव होने की पुष्टि हुई, जिसके बाद पति की जांच में भी संक्रमण सामने आया। बाद में जब बड़ी बेटी की तबीयत बिगड़ी और उसे चाईबासा सदर अस्पताल ले जाया गया, तो वहां जांच में वह भी एचआईवी पॉजिटिव पाई गई। पति का कहना है कि वे दोनों चुपचाप अपनी जिंदगी जीने की कोशिश कर रहे हैं और उन्हें समझ नहीं आ रहा कि इस स्थिति से कैसे निपटा जाये।
इस पूरे मामले पर प्रभारी सिविल सर्जन डॉ. भारती गोरती मिंज ने बताया कि एक परिवार के तीन सदस्यों के एचआईवी पॉजिटिव होने की जांच की जा रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि संक्रमण मां से आया है या किसी अन्य स्रोत से। विभाग द्वारा सभी मेडिकल रिकॉर्ड, ब्लड ट्रांसफ्यूजन की तारीख और डोनरों की जानकारी जुटाई जा रही है। मंगलवार को एचआईवी पॉजिटिव परिवार को अस्पताल बुलाया गया था, लेकिन वे नहीं आए। पॉजिटिव मरीजों का उपचार अस्पताल में किया जायेगा।
दूसरी ओर इस मामले पर झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि झारखंड में एक ही परिवार के तीन सदस्य महिला, उसका पति और उनकी बड़ी बेटी एचआईवी पॉजिटिव पाये गये हैं। जानकारी के अनुसार जनवरी 2023 में महिला की पहली डिलीवरी के दौरान चाईबासा सदर अस्पताल के ब्लड बैंक से खून चढ़ाया गया था। यह वही ब्लड बैंक है, जो पिछले वर्ष थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों के एचआईवी संक्रमण के मामलों को लेकर सुर्खियों में रहा था। इससे स्पष्ट होता है कि चाईबासा सदर अस्पताल में संक्रमित रक्त चढ़ाए जाने का मामला कोई नया नहीं है। आशंका है कि इस लापरवाही के कारण और भी कई लोग एचआईवी से संक्रमित हो सकते हैं। बाबूलाल मरांडी ने पूरे मामले को गंभीर बताते हुए इसे बड़ी साजिश की ओर इशारा करने वाला करार दिया है और ब्लड बैंक संचालन व अस्पताल प्रशासन की निष्पक्ष जांच सीबीआई से कराने की मांग की है।



