गांव-गांव पहुंची सेहत: अदाणी फाउंडेशन के स्वास्थ्य अभियान से 5,831 ग्रामीणों को राहत, उम्मीद की नई किरण
पीरपैंती (भागलपुर):पैसा नहीं होने के कारण इलाज नहीं करा पा रहे थे… अब डॉक्टर खुद हमारे गांव तक आ रहे हैं।’ यह शब्द हैं 55 वर्षीय बियोला मालतो के, जो पीरपैंती प्रखंड के सुदूर पहाड़िया टोला की रहने वाली हैं। महीनों से घुटनों के असहनीय दर्द के बावजूद, उन्होंने कभी शहर जाकर इलाज नहीं कराया, न दूरी आसान थी, न खर्च उठाना संभव। लेकिन हाल ही में उनके गांव में लगे एक स्वास्थ्य शिविर ने उनकी जिंदगी में उम्मीद की नई रोशनी जगा दी।
ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी को देखते हुए अदाणी फाउंडेशन ने पीरपैंती प्रखंड में एक व्यापक मल्टीस्पेशियलिटी स्वास्थ्य अभियान शुरू किया। इस पहल के तहत हरिणकोल, श्रीमतपुर, हुजूरनगर, पसाहीचक, मानिकपुर, ओलापुर सहित कुल 15 गांवों में स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए गए। इन शिविरों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने ग्रामीणों का नि:शुल्क स्वास्थ्य परीक्षण, दवा वितरण और परामर्श किया।
आंकड़ों में असर, जमीनी हकीकत में बदलाव:
कुल लाभार्थी: 5,831
महिलाएं: 2,803
पुरुष: 3,028
लेकिन ये सिर्फ आंकड़े नहीं हैं, ये उन हजारों कहानियों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जहां पहली बार किसी ने डॉक्टर को इतने करीब देखा।
इलाज के साथ जागरूकता का भी अभियान:
शिविर केवल इलाज तक सीमित नहीं रहे। डॉक्टरों ने ग्रामीणों को पोषण, स्वच्छता और नियमित स्वास्थ्य जांच के महत्व के बारे में जागरूक किया। कई लोगों को पहली बार अपनी पुरानी बीमारियों के बारे में सही जानकारी मिली।
ग्रामीणों के लिए ‘वरदान’ साबित हो रहे शिविर:
स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे शिविर दूरदराज के इलाकों के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं।
समय, पैसा और दूरी तीनों बाधाएं एक साथ खत्म हुईं।
सीएसआर से सामुदायिक बदलाव की ओर:
गांव के प्रतिनिधियों के अनुसार, संस्था शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में लगातार काम कर रही है। इस पहल का उद्देश्य केवल इलाज देना नहीं, बल्कि ग्रामीण समुदाय को स्वस्थ और आत्मनिर्भर बनाना है।
आगे भी जारी रहेगा यह अभियान:
अदाणी फाउंडेशन के अधिकारियों का कहना है कि आने वाले समय में भी ऐसे स्वास्थ्य शिविरों को लगातार चलाने की योजना है, ताकि दूरस्थ गांवों तक समय पर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा सकें।



