गणादेश खासः झारखंड में अनकंट्रोल हुई बिजली, कोयला की कमी, ब्लैक आउट के हालात
एक घंटा में एक मेगावाट बिजली उत्पादन के लिये एक टन कोयले की होती है जरूरत
अगर 24 घंटे 1000 मेगावाट का प्लांट चले तो 24 हजार टन कोयले की जरूरत होगी.
हर दिन खरीदी जा रही है सात से आठ करोड़ की बिजली, फिर भी डिमांड पूरा नहीं
12 रूपए प्रति यूनिट की दर से खरीदी जा रही है बिजली
रांचीः झारखंड में बिजली व्यवस्था पूरी तरह से अनकंट्रोल हो गई है। इसकी वजह कहीं न कहीं सरकार की उदासीनता भी रही है। एक ओर पावर प्लांटों में कोयले की कमी हो गई है, वहीं निजी से सेक्टर से भी कम बिजली मिल रही है। झारखंड ने इंडियन एनर्जी एक्सचेंज से 500 मेगावाट अतिरिक्त बिजली खरीद के लिए बिड किया था, लेकिन, राज्य को सिर्फ 50 मेगावाट बिजली ही मिली। झारखंड में बिजली की आपूर्ति सामान्य बनाये रखने के लिये इंडियन एनर्जी एक्सचेंज से जेबीवीएनएल प्रतिदिन करीब सात से आठ करोड़ रुपये की अतिरिक्त बिजली ऊंची दर 12 रुपये प्रति यूनिट पर खरीद रहा है. इसके अतिरिक्त 550 करोड़ की बिजली सामान्य कोटे से खरीदी जा रही है. इस हिसाब से हर दिन 558 करोड़ रुपये तक की बिजली खरीदी जा रही
जितना पैसा बिजली खरीद में फूंका, उतने में लग जाता पावर प्लांट
राज्य गठन के बाद से अब तक निजी और सेंट्रल सेक्टर से बिजली खरीद में 22 हजार करोड़ रुपये फूंके जा चुके हैं. इतने में 3500 मेगावाट का पावर प्लांट लग जाता। केंद्रीय विद्युत प्राधिकारण की गाइडलाइन के अनुसार एक मेगावाट में लगभग छह करोड़ रुपये का खर्च आता है. फिलहाल डीवीसी के पावर प्लांट में कोयले की कमी हो गई है.
डीवीसी को हर दिन चाहिए 24 हजार टन कोयला
डीवीसी के प्लांट को बिजली उत्पादन के लिये हर दिन 24 हजार टन कोयले की जरूरत है. फिलहाल डीवीसी को 10 हजार टन कोयला कम मिल रहा है. डीवीसी अपने कमांड एरिया के सात जिले हजारीबाग, बोकारो, धनबाद, रामगढ़, गिरिडीह, गढ़वा और कोडरमा में औसतन हर दिन 800 मेगावाट बिजली की आपूर्ति करता है. कोयले की कमी के कारण सिर्फ 500 मेगावाट ही बिजली आपूर्ति की जा रही है. 300 मेगावाट की कमी है. वहीं कोयले की कमी के कारण टीवीएनएल के एक ही यूनिट से बिजली का उत्पादन हो रहा है.डीवीसी कमांड एरिया को छोड़कर भी राज्य के अन्य जिलों में लगभग 300 से 350 मेगावाट बिजली की कमी है.
राजधानी सहित सभी जिलों में लोड शेडिंग
डीवीसी कमांड एरिया के सातों जिलों में आठ से नौ घंटे तक की लोड शेडिंग (बिजली की कटौती) की जा रही है. वहीं राजधानी सहित अन्य जिलों में तीन से चार घंटे तक की बिजली की कटौती की जा रही है. एक घंटा में एक मेगावाट बिजली उत्पादन के लिये एक टन कोयले की जरूरत होती है. अगर 24 घंटे 1000 मेगावाट का प्लांट चले तो 24 हजार टन कोयले की जरूरत होगी.
बंगाल को कोयला देना बंद
बीसीसीएल व ईसीएल ने पश्चिम बंगाल पावर डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड को कोयला देना बंद कर दिया है। इसकी बजह से डब्ल्यूपीडीसीएल की छह बिजली यूनिट बंद हो गई है। कोल इंडिया के निर्देश पर कोयले की सप्लाई एक सप्ताह से बंद है। वहीं छह यूनिट बंद होने से बंगाल समेत झारखंड के कुछ इलाकों में बिजली संकट उत्पन्न हो गया है। डब्ल्यूपीडीसीएल से धनबाद सहित आसपास के कई जिलों में भी बिजली की आपूर्ति होती है। डब्ल्यूपीडीसीएल के कोलाघाट, संथातडीह, सागरदीघी, बोकेश्वर, बंदेल पावर प्लांट में 50 हजार टन कोयले का ही स्टाक बचा हुआ है। वहीं डब्ल्यूपीडीसीएल का अपना कोयला माइंस है, जहां क्षमता के अनुसार कोयला उत्पादन नहीं हो पा रहा है।
किस पावर प्लांट में प्रतिदिन कितने कोयले की खपत
टीवीएनल- 7000 टन
डीवीसी- 24000 टन
आधुनिक- 10 हजार टन
इंलैंड- 2000 टन

