पर्यावरण अध्ययन एवं आपदा प्रबंधन” विषय पर चल रहे रिफ्रेशर कोर्स में डॉ. विनय भरत ने दिया व्याख्यान
रांची : 5 से 18 सितंबर तक आयोजित “पर्यावरण अध्ययन एवं आपदा प्रबंधन” रिफ्रेशर कोर्स के अंतर्गत बुधवार को विशेष सत्र में डॉ. विनय भरत ने “पर्यावरण और साहित्य” विषय पर अपना व्याख्यान दिया। डॉ. भरत ने अपने वक्तव्य की शुरुआत झारखण्ड के आदिवासी साहित्यकार जसिंता केरकेट्टा की इन पंक्तियों से की—
“वे हमारे सभ्य होने के इंतजार में हैं / और हम उनके मनुष्य होने के।”
इन पंक्तियों के माध्यम से उन्होंने साहित्य और पर्यावरण के गहरे संबंध को सामने रखते हुए झारखंड के आदिवासी साहित्य पर विशेष ध्यान केंद्रित किया।
डॉ. भरत ने अपने व्याख्यान में बताया कि जैसे-जैसे समय बदला है, साहित्य के स्वरूप और प्रस्तुतिकरण में भी बदलाव आया है। मोटी किताबों से हटकर अब छोटे-छोटे विज्ञापनों की पंच लाइन्स हमारे अवचेतन तक पहुँच रही हैं और हमारी जीवनशैली व संस्कृति को प्रभावित कर रही हैं। आज के समय में ऐसे विज्ञापनों के उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि 21वीं सदी का महावाक्य बन चुका है :
बाजार की आक्रामकता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह हमारे दिलो-दिमाग तक गहरे रूप से पैठ गई है।बाजार के इस शोरगुल के बीच, उन्होंने झारखंड के महान साहित्यकार महादेव टोप्पो को पढ़ने की आवश्यकता पर बल दिया, जहाँ टोप्पो लिखते हैं— “अगर आप पहाड़, पर्वत, जंगल, जानवर को आदमी नहीं समझते तो मेरी कविता मत पढ़िए।”डॉ. भरत ने जोर दिया कि हमें झारखंड की लोक कहानियों को पढ़ना चाहिए, जो पर्यावरण से गहरे जुड़ी हुई हैं। चाहे वह “छैला संदू और बूंदी” की कहानी हो या “बानर बहुरिया,” ये कहानियाँ महुआ, हड़िया, पत्तों के दोने, लाख, इमली, शहतूत जैसे प्राकृतिक तत्वों के इर्द-गिर्द घूमती हैं। ये कहानियाँ आज से 50,000 साल पहले तक के पहाड़ों, नदियों और जंगलों को आज भी जीवंत बनाए रखती हैं।
उन्होंने कहा कि आज जब विकास के नाम पर गांवों के पहाड़ी स्थलों को खनिज और खनन के लिए मिटाया जा रहा है, तब इन कहानियों और उनके पर्यावरणीय संदर्भों का महत्व तभी तक जीवित रहेगा, जब तक इनकी जड़ें पर्यावरण में दफन हैं।डॉ. भरत ने डॉ. राम दयाल मुंडा की पुस्तक “आदि धरम” से प्रकृति से जुड़ी प्रार्थनाओं को उद्धृत करते हुए बताया कि इन प्राचीन ग्रंथों को सिर्फ पढ़ने की नहीं, बल्कि उनके पुनर्पाठ की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया की हर गतिविधि एक टेक्स्ट है, और हमें वैश्विक कॉर्पोरेट घरानों की हालिया गतिविधियों पर पैनी नजर रखनी चाहिए। कार्यक्रम का स्वागत एवं धन्यवाद ज्ञापन कोर्स कोऑर्डिनेटर डॉ. स्मिता लिंडा द्वारा किया गया।

