कहलगांव विधानसभा : त्रिकोणीय मुकाबले में कांग्रेस आगे, जेडीयू से सीधी टक्कर के आसार
पटना : बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान के बाद अब दूसरे चरण की सरगर्मी चरम पर है। दूसरे चरण में 11 नवंबर को मतदान होना है, और इस बार कहलगांव विधानसभा सीट चुनावी राजनीति का केंद्र बन गई है। यहां मुकाबला बेहद रोचक और त्रिकोणीय होता दिख रहा है।
इस सीट पर पूर्व बीजेपी विधायक पवन यादव को पार्टी से टिकट नहीं मिलने के बाद उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान संभाल लिया है। सीट एनडीए गठबंधन में जेडीयू के हिस्से में आई है, और पार्टी ने पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सदानंद सिंह के पुत्र शुभेंदु मुकेश को प्रत्याशी बनाया है। दूसरी ओर कांग्रेस ने क्षेत्र में सक्रिय और लोकप्रिय चेहरा प्रवीण सिंह कुशवाहा को मैदान में उतारा है, जबकि राजद ने झारखंड के मंत्री संजय प्रसाद यादव के पुत्र रजनीश यादव को प्रत्याशी बनाया है।
स्थानीय समीकरणों की बात करें तो कहलगांव क्षेत्र में यादव, धानुक, कोयरी और कुरमी समुदाय की संख्या काफी प्रभावशाली है। इन मतदाताओं का झुकाव किसी भी प्रत्याशी की जीत-हार तय कर सकता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यादव वोटों में इस बार बंटवारा तय है — एक ओर राजद प्रत्याशी रजनीश यादव और दूसरी ओर निर्दलीय पवन यादव के बीच। ऐसे में इसका सीधा लाभ कांग्रेस प्रत्याशी प्रवीण सिंह कुशवाहा को मिल सकता है, जो गैर-यादव पिछड़े और अल्पसंख्यक मतदाताओं में मजबूत पकड़ रखते हैं।
वहीं एनडीए का पारंपरिक वोट बैंक — ब्राह्मण, भूमिहार, राजपूत, बनिया और व्यापारी वर्ग — जेडीयू प्रत्याशी शुभेंदु मुकेश के साथ जुड़ा हुआ है। हालांकि जमीनी स्तर पर कांग्रेस का प्रचार अभियान और संगठनात्मक मजबूती फिलहाल अन्य दोनों उम्मीदवारों से आगे दिखाई दे रही है।
राजनीतिक माहौल से साफ है कि कहलगांव सीट पर अंतिम मुकाबला जेडीयू और कांग्रेस के बीच सिमटेगा। 9 नवंबर की शाम को प्रचार थमने के बाद 11 नवंबर को जनता मतदान के जरिए तय करेगी कि कहलगांव का ताज किसके सिर सजेगा।


