बिहपुर चुनाव हार, लेकिन हौसला कायम: अर्पणा कुमारी बोलीं – ‘यह हार नहीं, यह मेरे लिए सीख’
भागलपुर। जिले के बिहपुर विधानसभा चुनाव 2025 में जेडीयू सांसद अजय कुमार मंडल की रिश्तेदार इंडिया गठबंधन की प्रत्याशी अर्पणा कुमारी भले ही लगभग 30 हजार मतों से हार गई हों, लेकिन उनके बयान ने चुनावी माहौल में एक अलग ही स्वर जोड़ दिया है। अर्पणा ने हार को स्वीकार करते हुए आत्ममंथन, भविष्य की तैयारी और जनता से मिले समर्थन को खुले शब्दों यानी बेबाकी से गणादेश के समक्ष रखी।अर्पणा बोलीं – ‘यह हार नहीं, यह मेरे लिए सीख है’। उन्होंने स्वीकार किया कि मजबूत चुनावी मशीनरी तैयार करने को पर्याप्त समय नहीं मिल पाया।मेरी नीयत और मेरी कोशिश लोगों तक पूरी तरह नहीं पहुंच सकी।सिर्फ 15 दिन का वक्त… और नया क्षेत्र;अर्पणा कुमारी ने स्पष्ट कहा कि चुनाव में उतारने का निर्णय बहुत अचानक हुआ। ‘मुझे नामांकन से पहले सिर्फ 15 दिन मिले। नया इलाका, नए लोग… इतने कम समय में हर गांव और हर बूथ तक पहुंचना संभव नहीं था।’संगठन की कमी भी बनी चुनौती: उन्होंने स्वीकार किया कि मजबूत चुनावी मशीनरी तैयार करने को पर्याप्त समय नहीं मिल पाया।
‘बूथ कमेटियां, स्थानीय नेटवर्क और लंबे समय की तैयारी ये सब किसी भी चुनाव की रीढ़ होते हैं। मैं अचानक मैदान में आई, इसलिए ये मजबूती नहीं बन पाई।’ लोग सुन रहे थे, बातचीत हो रही थी, लेकिन भावनात्मक जुड़ाव को समय चाहिए। विश्वास का रिश्ता बन रहा था, लेकिन चुनाव उससे पहले ही खत्म हो गया।स्थानीय मुद्दों को समझने का वक्त कम: बिहपुर की अपनी सामाजिक और राजनीतिक जटिलताएं हैं। अर्पणा कहती हैं – 15 दिनों में मुद्दों की तह तक पहुंचना कठिन था। कोशिश की, लेकिन समय कम था। मेरी नीयत और मेरी कोशिश लोगों तक पूरी तरह नहीं पहुंच सकी। उन्होंने माना कि सीमित समय में अपने विज़न और अपनी वास्तविक पहचान को जनता तक पहुंचाना चुनौती रहा।अर्पणा कुमारी इस हार को हतोत्साहित करने वाला नहीं मानतीं। ‘इस चुनाव ने बहुत कुछ सिखाया।जनता का दिल जीतने में समय लगता है, संगठन को मजबूत बनाना जरूरी है और हर घर तक पहुंच बनानी होती है,’ उन्होंने कहा।
अर्पणा के मुताबिक, जिस क्षेत्र में वे अचानक उतरीं, वहां हजारों लोगों ने उन्हें अपना प्रतिनिधि मानकर वोट दिया। ‘यह सम्मान मेरे लिए किसी जीत से कम नहीं,’ उन्होंने गर्व से कहा। अर्पणा कुमारी ने साफ कर दिया कि वे अब लगातार क्षेत्र में रहेंगी, लोगों से जुड़ेंगी और समस्याओं पर काम करेंगी। उनका कहना है – ‘चुनाव सेवा का माध्यम है… सेवा की भावना कभी हारती नहीं।’ बिहपुर की राजनीति में अर्पणा कुमारी भले ही पहली बार उतरी हों, लेकिन उनका यह आत्ममंथन और शांत स्वीकृति उन्हें आने वाले समय में एक गंभीर और परिपक्व नेता के रूप में स्थापित कर सकता है।



