खदान घोटला के बाद झारखंड के साहिबगंज में दूसरा सबसे बड़ा घोटला, पत्थर खनन में 1000 करोड़ का अवैध कारोबार
टॉप से बॉटम के अफसर -कर्मचारी कर रहे थे धरती का सीना चीर कर पत्थरों की निकासी
आइएएस और आइएफएस भी जांच के दायरे में
ईडी ने जब ड्रोन से ली तस्वीर तो टीम के उड़ गए होश
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अफसरों को समन भेजेगी ईडी
रांचीः झारखंड की धरती का सीना चीरकर पत्थरों से अवैध कमाई करने में टॉप से लेकर बॉटम कर के अफसर कर्मचारी शामिल हैं। साहेबगंज में ईडी की कार्रवाई गुरुवार को भी जारी है। सूत्रों के अनुसार फिलहाल ईडी ने अपनी जांच का दायरा बढ़ा दिया है। पुख्ता सूत्रों के अनुसार साहेबगंज में ईडी को अवैध पत्थर खनन से 1000 करोड़ रुपए के कारोबार का साक्ष्य भी मिला है। इडी इन साक्ष्यों का सत्यापन करने में जुटी है। इस खेल में आइएएस और आइएफएस भी भूमिका रही है। जब इडी ने गुरुवार को ड्रोन कैमरे की नजर से पत्थर खदानों को देखने की कोशिश की तो टीम के सदस्य अचंभित रह गए। मंडरो अंचल के माझीकोला,सिमरिया, मुंडली, छोटा दामिनभिट्ठा,भूताहा आदि मौजों में संचालित कई पत्थर खदानों की जांच के बाद बड़े पैमाने पर अवैध पत्थर उत्खनन का मामला पकड़ा है। बड़ी बात यह है कि ऐसे मामले भी ईडी के सामने आए हैं जहां वैध पट्टा रहने के बावजूद लीज क्षेत्र से बाहर जाकर बड़े पैमाने पर पत्थर उत्खनन किया गया है। वन क्षेत्र या उससे सटे इलाकों में भी पत्थर उत्खनन की बात ईडी के सामने आई है। इस खेल में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दो पूर्व अध्यक्ष की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है। वहीं साहेबगंज के तत्कालीन डीसी और तत्कालीन डीएफओ की जांच के दायरे में आ गए हैं। ईडी सूत्रों के अनुसार इस खेल में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अफसरों की भी भूमिका रही है। साहेबगंज डीएफओ मनीष तिवारी के कार्यालय से भी इडी को अहम दस्तावेज हाथ लगे हैं। सूत्रों के अनुसार ईडी जल्द ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अफसरों को समन भेजेगी।

