कैबिनेट से पेसा एक्ट पास होने पर झामुमो का भाजपा पर तंज, पूछा—बाबूलाल मरंडी, अर्जुन मुंडा और रघुवर दास ने क्यों नहीं किया लागू कानून

गणादेश,रांची: झारखंड में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा कैबिनेट से पेसा कानून को पारित किए जाने के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। इस फैसले को आदिवासी स्वशासन और लोकतंत्र की मजबूती की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया जा रहा है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने इसे हेमंत सोरेन सरकार की बड़ी उपलब्धि करार देते हुए भाजपा पर तीखा हमला बोला है।

झामुमो के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने बुधवार को पार्टी कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पेसा कानून को लागू कर इतिहास रच दिया है, जिसे आने वाली पीढ़ियां याद रखेंगी। उन्होंने कहा कि पेसा लोकतंत्र का मूल आधार है, जो ग्रामसभा को वास्तविक शक्ति प्रदान करता है।

सुप्रियो भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि केंद्र की भाजपा सरकार देश में लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर कर संख्या बल के आधार पर अधिनायकवादी व्यवस्था थोपने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि पेसा कानून का प्रभावी क्रियान्वयन ऐसे प्रयासों पर झारखंड में मजबूत रोक लगाएगा। उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि उसने कॉरपोरेट हितों के लिए अरावली, हाजजीला और अन्य वन क्षेत्रों को निजी कंपनियों को सौंप दिया।

उन्होंने कहा कि पेसा कानून वर्ष 1996 में बना था और इसका उद्देश्य अनुसूचित क्षेत्रों में ग्रामसभा की सहमति को अनिवार्य बनाना है। इस कानून के तहत किसी भी प्रकार के निर्माण, खनन या विकास परियोजना से पहले ग्रामसभा से अनुमति लेना जरूरी है।

झामुमो नेता ने भाजपा पर सवाल उठाते हुए कहा कि बाबूलाल मरंडी, अर्जुन मुंडा और रघुवर दास के लंबे शासनकाल में पेसा कानून को लागू क्यों नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि भाजपा ने कई राज्यों में पेसा कानून की मूल भावना को कमजोर कर दिया है।

सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि अब ग्रामसभा तय करेगी कि गांव में शिक्षा, विकास और संसाधनों का उपयोग कैसे होगा। अब फैसले प्रोजेक्ट भवन में नहीं, बल्कि गांव और समाज के बीच होंगे। गांव जो तय करेगा, राज्य उसी रास्ते पर चलेगा।

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