शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर के बाद जीतनराम मांझी ने भी रामचिरतमानस पर दिया अटपटा बयान,कहा-इसमे कुछ चौपाइयों को हटाना चाहिए
पटना: बिहार के मुख्यमंत्री रह चुके जीतन राम मांझी ने एक फिर रामचरितमानस को लेकर अटपटा बयान दिया है। उनका कहना है कि रामचिरतमानस में कुछ ऐसी चौपाइयां हैं, जिन्हें हटाने पर मानस मर्मज्ञों को ध्यान देना चाहिए। मांझी ने शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर की तरह सीधे रामचरितमानस को खारिज नहीं किया है। उनका कहना है कि रामचरितमानस में कुछ चौपाइयां ही आपत्तिजनक हैं। उन्हें हटा दिया जाये तो यह एक उत्तम महाकाव्य है। बकौल मांझी, वो तुलसी कृत रामचरितमानस को धार्मिक ग्रंथ नहीं मानते। मांझी ने इस दौरान उन चौपाइयों का भी जिक्र किया, जिन्हें वो गलत मानते हैं।
मांझी ने तीन चौपाइयों का जिक्र किया- नारी, नीर, नीच कटी धावा….ढोल, गंवार, शूद्र, पशु, नारी/ सकल ताड़ना के अधिकारी और पूज्य विप्र शील-गुण हीना। शुरू की दो चौपाइयों में मांझी को नारी के लिए कही गयी बातों पर एतराज है। इसलिए कि समाज में नारी की आबादी 50 फीसदी है और इतनी बड़ी आबादी के बारे में तुलसी दास की सोच सही नहीं दिखती। रामायण के जानकारों को इन पंक्तियों के बारे में स्पष्ट करना चाहिए। अगर ऐसी कुछ पंक्तियां रामचरितमानस से निकाल दी जायें तो यह अच्छा महाकाव्य है। इन्हीं पंक्तियों की वजह से रामायण का विरोध समय-समय पर होता रहता है। हालांकि कुछ पंक्तियों पर आपत्ति के बावजूद मांझी यह भी कहते हैं कि रामचरितमानस का अध्ययन हंस की तरह करना चाहिए। जैसे हंस पानी से दूध अलग कर पी लेता है, उसी तरह रामचिरत मानस से अच्छी चीजें चुन लेनी चाहिए और जो बेकार लगें, उन्हें छोड़ देना चाहिए।

