आदिवासी जमीन की लूट रोकने को संघर्ष तेज करेगा आदिवासी जन परिषद, पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन की मांग

गणादेश,रांची: झारखंड में आदिवासियों की जमीन लूटने से बचाने के लिए आदिवासी जन परिषद एक्टिव हो गया है। परिषद के अध्यक्ष प्रेम शाही मुंडा के नेतृत्व में अभियान चलाकर आदिवासियों की जमीन गैर आदिवासियों से मुक्त कराया जा रहा है। इस अभियान को और तेज करने को लेकर शनिवार को रांची के करमटोली स्थित धूमकुड़िया सभागार में आदिवासी जन परिषद की बैठक हुई। बैठक में आदिवासी समाज के सामाजिक, राजनीतिक और भूमि अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। संगठन ने आरोप लगाया कि आदिवासी जमीनों पर अवैध कब्जा और खरीद-बिक्री लगातार बढ़ रही है, जिसे रोकने के लिए व्यापक जनजागरण और संघर्ष की जरूरत है।

बैठक में कहा गया कि पेसा कानून की धारा 33(1)(2) एवं अध्याय-15 के तहत ग्राम सभाओं को सशक्त बनाकर जमीन से जुड़े मामलों का समाधान किया जाना चाहिए। संगठन ने राज्य सरकार से पेसा कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने और गांव स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने की मांग की। साथ ही स्थानीय नियोजन नीति लागू नहीं होने पर भी चिंता जताई गई और कहा गया कि इससे झारखंड के आदिवासी एवं मूलवासी युवाओं के रोजगार पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।

बैठक में सर्वसम्मति से कई प्रस्ताव पारित किए गए। इनमें आदिवासियों की धार्मिक एवं सांस्कृतिक जमीनों की सुरक्षा के लिए संघर्ष तेज करना, जमीन की अवैध खरीद-बिक्री रोकने हेतु जिला स्तरीय कोर कमेटी का गठन, युवाओं एवं महिलाओं को संगठन से जोड़ना, धर्म कोड और पेसा कानून पर ग्राम स्तर पर जागरूकता अभियान चलाना, 18 जुलाई को नगड़ी जमीन बचाओ संघर्ष समिति द्वारा राजभवन के समक्ष आयोजित कार्यक्रम को समर्थन देना तथा जिलास्तरीय सदस्यता अभियान चलाना शामिल है।

बैठक में प्रधान महासचिव अभय भुटकुंवर, महासचिव प्रकाश मुंडा, सचिव विष्णु मुंडा, महिला मोर्चा की उपाध्यक्ष सेलीना लकड़ा, रांची महानगर अध्यक्ष शीला उरांव, रामगढ़ जिला अध्यक्ष अशोक बेदिया, पंचपरगना क्षेत्र अध्यक्ष सिदाम मुंडा, रांची ग्रामीण अध्यक्ष सुनील हीरो, शिवरतन मुंडा, पवन करमाली और जमशेदपुर पूर्वी महिला अध्यक्ष रूबी बासा सहित कई पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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