आस्था और लोकतंत्र का संगम: भागलपुर में “भास्कर महोत्सव” के जरिए मतदाता जागरूकता का अनोखा संदेश
भागलपुर। छठ की आराधना, लोक परंपरा और लोकतंत्र की भावना। इन तीनों का अद्भुत संगम देखने को मिला भागलपुर में आयोजित भास्कर महोत्सव में। बिहार विधान सभा आम निर्वाचन 2025 के तहत मतदाता जागरूकता को नया आयाम देने के लिए जिला प्रशासन ने इस अनोखे कार्यक्रम का आयोजन किया, जो न केवल सांस्कृतिक रूप से जीवंत रहा बल्कि जनचेतना से भी सराबोर था।
स्वीप कार्यक्रम के तहत आयोजित इस भव्य आयोजन का उद्देश्य था – स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान को बढ़ावा देना तथा जिले में मतदान प्रतिशत में वृद्धि करना। छठ पर्व की पावन बेला में जब शहर घाटों की ओर नहा-खाए और खरना की तैयारी में जुटा था, उसी समय भागलपुर के सांस्कृतिक मंच पर आस्था और जागरूकता का एक सुंदर समागम हुआ।
दीप प्रज्वलन से शुरू हुआ सांस्कृतिक उत्सव
कार्यक्रम का उद्घाटन जिला निर्वाचन पदाधिकारी-सह-जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने दीप प्रज्वलित कर किया। उनके साथ मंच पर सहायक समाहर्ता श्री जतिन कुमार, जिला शिक्षा पदाधिकारी श्री राजकुमार शर्मा, तथा जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी श्री अंकित रंजन उपस्थित थे।
जिलाधिकारी ने दीप प्रज्वलन के साथ संदेश दिया छठ केवल एक पर्व नहीं, बल्कि अनुशासन, संयम और सामूहिकता का प्रतीक है। ठीक वैसे ही, मतदान भी हमारी आस्था और जिम्मेदारी दोनों का संगम है।
छठ की धुनों पर गूंजा मतदाता संदेश
स्थानीय कलाकारों ने मंच पर लोकसंस्कृति की झलक पेश की। छठी मइया की आराधना, सूर्योपासना और मातृशक्ति के समर्पण पर आधारित गीतों एवं लोकनृत्यों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
गीतों के बीच-बीच में कलाकारों ने मतदान को लेकर प्रेरक संदेश भी दिए। छठी मइया से करें अर्घ्य का व्रत, लोकतंत्र में निभाएं मतदान का ऋत। इस तरह कार्यक्रम में आस्था और जागरूकता दोनों का समन्वय दिखाई दिया।
कार्यक्रम के समापन पर जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने कहा कि पर्व आस्था, संयम और साधना का पर्व है जो हमें सामूहिक जिम्मेदारी का भाव सिखाता है। जैसे हम घाट पर पूरी निष्ठा से सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं, वैसे ही 11 नवंबर को मतदान केंद्र पर जाकर अपने मत का अर्घ्य अर्पित करें। यही सच्ची भक्ति और लोकतंत्र के प्रति कृतज्ञता होगी। उन्होंने यह भी साझा किया कि उन्होंने स्वयं दो वर्षों तक छठ पर्व मनाया है और उस अनुभव ने उन्हें साझा आस्था और अनुशासन की गहराई सिखाई है।
कार्यक्रम के अंत में सभी पदाधिकारियों एवं कलाकारों ने मिलकर जिलेवासियों से मतदान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की। भास्कर महोत्सव न केवल सांस्कृतिक उत्सव रहा, बल्कि यह भागलपुर प्रशासन की एक अभिनव पहल के रूप में उभरा जिसने यह संदेश दिया कि लोकतंत्र और लोकसंस्कृति एक-दूसरे के पूरक हैं।कला और संस्कृति के माध्यम से मतदाता जागरूकता का प्रसार। 11 नवंबर को शत-प्रतिशत मतदान का लक्ष्य। भागलपुर में छठ पर्व की संध्या पर जब आस्था के दीप जले, तो उसी रोशनी में लोकतंत्र का दीप भी जगमगा उठा। “भास्कर महोत्सव” ने यह सिखाया कि सूर्य को अर्घ्य देना धर्म है, वोट देना नागरिक धर्म है।



