भाजपा की राजनीति दोमुंही, अपने शासन में फैसला करे तो नीति, दूसरे करें तो जनविरोधी : ऋषीकेश सिंह
रांची : झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के प्रदेश सचिव सह प्रदेश प्रवक्ता ऋषीकेश सिंह ने भूमि एवं भवन की रजिस्ट्री पर अतिरिक्त 10 प्रतिशत सरचार्ज के मुद्दे पर भाजपा के बयान को राजनीतिक अवसरवाद करार देते हुए कहा कि जनता की आर्थिक परेशानियों पर घड़ियाली आंसू बहाने के बजाय भाजपा को अपने शासनकाल का हिसाब देना चाहिए। कांग्रेस आम लोगों पर पड़ने वाले अतिरिक्त आर्थिक बोझ को लेकर गंभीर है, लेकिन भाजपा की तरह आधे-अधूरे तथ्यों के सहारे जनता को गुमराह करने में विश्वास नहीं करती।
ऋषीकेश सिंह ने कहा कि भाजपा पहले स्पष्ट करे कि 10 प्रतिशत सरचार्ज संपत्ति की कुल कीमत पर लगाया जा रहा है या स्टांप शुल्क एवं निबंधन शुल्क की राशि पर। दोनों में बड़ा अंतर है। यदि दोनों शुल्क मिलाकर एक लाख रुपये हैं, तो 10 प्रतिशत सरचार्ज दस हजार रुपये होगा, न कि संपत्ति की पूरी कीमत का दस प्रतिशत। हालांकि, अतिरिक्त शुल्क का बोझ अंततः खरीदार पर ही पड़ता है। इसलिए सरकार को इसके प्रभाव की समीक्षा कर आम नागरिकों को राहत देने के विकल्पों पर विचार करना चाहिए।
ऋषीकेश सिंह ने कहा कि भाजपा आज महिलाओं के नाम पर एक रुपये में रजिस्ट्री की व्यवस्था का गुणगान कर रही है, लेकिन वर्ष 2017 में तत्कालीन रघुवर दास सरकार द्वारा शुरू की गई इस व्यवस्था को मई 2020 में वापस ले लिया गया था। भाजपा बताए कि उस समय यह योजना क्यों बंद की गई? महिलाओं का सशक्तिकरण केवल भाषणों से नहीं, बल्कि प्रभावी नीतियों से होता है। कांग्रेस महिलाओं को संपत्ति का अधिकार देने और जरूरतमंद परिवारों को राहत देने वाली व्यवस्था की पक्षधर है।
ऋषीकेश सिंह ने कहा कि नगर निकायों को सड़क, नाली, पेयजल और स्वच्छता जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए संसाधन चाहिए, लेकिन राजस्व बढ़ाने के नाम पर आम जनता की जेब पर पड़ने वाले बोझ की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। सरकार अतिरिक्त राशि के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करे। भाजपा यदि वास्तव में जनहित की पक्षधर है, तो केवल विरोध करने के बजाय ठोस विकल्प भी बताए।
अंत में ऋषीकेश सिंह ने कहा कि कांग्रेस जनता पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डालने वाले फैसलों पर सवाल उठाती रहेगी। भाजपा को गुमराह करने की राजनीति छोड़कर अपने शासनकाल के फैसलों का जवाब देना चाहिए। जनता को राजनीतिक ड्रामा नहीं, राहत चाहिए; आरोपों की राजनीति नहीं, जवाबदेही चाहिए।


