ऐतिहासिक मुड़मा पाड़हा जतरा की जमीन की बंदोबस्ती करे सरकार, रैयतों को मिले मुआवजा: संजय कुमार पाहन
रांची:मांडर प्रखंड के मुड़मा स्थित ऐतिहासिक पाड़हा जतरा स्थल की भूमि के सीमांकन, संरक्षण और बंदोबस्ती का मामला वर्षों से लंबित है। इस मामले में राजी पाड़हा जतरा समिति ने झारखंड सरकार और रांची जिला प्रशासन से शीघ्र पहल करने की मांग की है। समिति के वरीय सदस्य संजय कुमार पाहन ने कहा कि ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले इस स्थल की जमीन को लेकर बार-बार विवाद की स्थिति उत्पन्न हो रही है। इसका स्थायी समाधान संबंधित भूमि की बंदोबस्ती, सीमांकन और रैयत परिवारों को उचित मुआवजा अथवा वैकल्पिक जमीन उपलब्ध कराने से ही संभव है।
समिति के अनुसार, मुड़मा पाड़हा जतरा छोटानागपुर के आदिवासी समाज, विशेषकर उरांव और मुंडा समुदाय की ऐतिहासिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत का प्रमुख केंद्र है। यह स्थल पारंपरिक पाड़हा स्वशासन व्यवस्था से भी जुड़ा हुआ है। यहां प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले जतरा समारोह में देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचते हैं। 40 पड़हा के प्रतिनिधियों के साथ बेल, दीवान, पहान, महतो, मुंडा, कोटवार और पनभरा सहित पारंपरिक पदाधिकारी अपने-अपने गांवों के देवी-देवताओं की परिक्रमा विधि-विधान से जतरा खूंटा शक्ति स्थल पर कराते हैं। समारोह में राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मंत्री, सांसद और विधायक भी शामिल होते रहे हैं।
समिति ने बताया कि ऐतिहासिक जतरा का आयोजन परंपरागत रूप से लगभग 65 एकड़ भूमि पर होता रहा है। इस जमीन के सीमांकन और बंदोबस्ती के लिए विभिन्न स्तरों पर सरकार को आवेदन दिए गए हैं। तीन अप्रैल 2012 को मुख्यमंत्री के आप्त सचिव अरुण कुमार सिंह ने पत्र संख्या 7302517 के माध्यम से रांची के उपायुक्त को भूमि बंदोबस्ती के संबंध में निर्देश दिया था। इसके बाद सात फरवरी 2014 को राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने झारखंड के पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिया। वहीं, मांडर के अंचल अधिकारी ने 23 सितंबर 2015 को पत्रांक 618(1) के माध्यम से 63.12 एकड़ भूमि से संबंधित जांच प्रतिवेदन विभागीय अधिकारियों को भेजा था।
समिति के मुताबिक, राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के अपर सचिव ने 16 अगस्त 2016 को रांची के उपायुक्त को पत्र जारी कर ऐतिहासिक पाड़हा जतरा स्थल का सीमांकन कराने, संबंधित रैयतों को अन्यत्र सरकारी गैरमजरूआ जमीन उपलब्ध कराने तथा रैयती एवं सरकारी गैरमजरूआ भूमि की बंदोबस्ती पाड़हा जतरा समिति, मुड़मा के नाम करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद मामला अब तक लंबित है।
समिति ने भूमि विवाद से जुड़े आरोपों और ग्रामसभा के निर्णय का उल्लेख करते हुए कहा कि 20 सितंबर 2026 को जतरा स्थल की जमीन पर स्थायी निर्माण पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया था। समिति का आरोप है कि इसके बावजूद संबंधित जमीन पर निर्माण कार्य शुरू किया गया। समिति ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष से विवाद करना नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की ऐतिहासिक धरोहर और धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराओं का संरक्षण करना है।
समिति की मांग है कि रांची के उपायुक्त लंबित बंदोबस्ती की प्रक्रिया शीघ्र पूरी करें। संबंधित रैयत परिवारों को नियमानुसार उचित मुआवजा दिया जाए अथवा उनके लिए वैकल्पिक भूमि की व्यवस्था की जाए। साथ ही, मुड़मा पाड़हा जतरा स्थल का विधिवत सीमांकन कराकर उसे संरक्षित किया जाए, ताकि भविष्य में भूमि विवाद की पुनरावृत्ति न हो और आदिवासी समाज की इस ऐतिहासिक विरासत को सुरक्षित रखा जा सके। इस अवसर पर सूरज कुमार सहित कई लोग उपस्थित थे।


