क्षेत्रीय भाषाओं की डिजिटल आवाज को मिला राष्ट्रीय मंच, बीएचयू की पुस्तक में छपा डॉ. मयंक वत्स का शोध-पत्र
भागलपुर: सबौर महाविद्यालय के शिक्षक डॉ. मयंक वत्स ने अकादमिक एवं शोध के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए महाविद्यालय का गौरव बढ़ाया है। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग द्वारा आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में प्रस्तुत उनका शोध-पत्र “Growth of Digital Journalism in Regional Languages” देशभर से प्राप्त शोध-पत्रों में चयनित होकर पुस्तक के रूप में प्रकाशित हुआ है।
यह उपलब्धि डॉ. वत्स की शोधपरक सक्रियता और अकादमिक योगदान को रेखांकित करती है। साथ ही, यह तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय एवं सबौर महाविद्यालय के लिए भी गौरव का विषय है।
बीएचयू में हुआ था तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार:
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग की ओर से 16 से 18 जनवरी तक “Changing Trends in Journalism and Mass Communication in the Era of Social Media” विषय पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया गया था। इसमें देश के विभिन्न हिस्सों के साथ-साथ विदेशों से शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, मीडिया विशेषज्ञों, बुद्धिजीवियों एवं समाजसेवियों ने सहभागिता की।सेमिनार में पत्रकारिता एवं जनसंचार के बदलते स्वरूप, सोशल मीडिया के प्रभाव तथा डिजिटल मीडिया की नई संभावनाओं सहित विभिन्न समकालीन विषयों पर व्यापक अकादमिक विमर्श हुआ।सेमिनार का आयोजन सचिव प्रो. (डॉ.) बाला लखेंद्र तथा संयोजक एवं विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) ज्ञान प्रकाश मिश्रा के निर्देशन में किया गया। कार्यक्रम में देश-विदेश से आए विद्वानों ने अपने विचार एवं शोध प्रस्तुत किए।
प्रमुख वक्ताओं में प्रो. (डॉ.) राममोहन पाठक, पूर्व कुलपति, नेहरू ग्राम भारती विश्वविद्यालय; डॉ. आशीष द्विवेदी, निदेशक, स्कूल ऑफ जर्नलिज्म, भोपाल; डॉ. अनिल उपाध्याय, पूर्व अध्यक्ष, पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ; तथा डॉ. अनिल जाजोदिया, अध्यक्ष, पब्लिक रिलेशंस सोसाइटी ऑफ इंडिया, वाराणसी चैप्टर सहित अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ शामिल थे। कार्यक्रम का अध्यक्षीय भाषण प्रो. संजीव भाणावत, मुख्य संपादक, कम्युनिकेशन टुडे, ने दिया।
करीब 300 शोध-पत्रों में से 30 का हुआ चयन:
सेमिनार में पत्रकारिता, जनसंचार, डिजिटल मीडिया, सोशल मीडिया, नई तकनीक और संचार के बदलते आयामों से संबंधित लगभग 300 शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए। तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय की ओर से सबौर महाविद्यालय के डॉ. मयंक वत्स ने इसमें सहभागिता करते हुए अपना शोध-पत्र प्रस्तुत किया।डॉ. वत्स के शोध-पत्र में क्षेत्रीय भाषाओं में डिजिटल पत्रकारिता के तेजी से बढ़ते प्रभाव और महत्व को केंद्र में रखा गया। शोध में रेखांकित किया गया कि डिजिटल क्रांति के दौर में पत्रकारिता अब केवल महानगरों अथवा अंग्रेजी भाषा तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय क्षेत्रीय भाषाओं में भी इसका तेजी से विस्तार हो रहा है। इससे स्थानीय समाचार, विचार, संस्कृति, सामाजिक सरोकार एवं जनसमस्याओं को व्यापक समाज तक पहुंचने का अवसर मिल रहा है।शोध-पत्र में इंटरनेट एवं स्मार्टफोन की बढ़ती पहुंच को क्षेत्रीय भाषाओं में समाचार और सूचना के प्रसार में महत्वपूर्ण कारक बताया गया। डिजिटल प्लेटफॉर्मों के माध्यम से समाज के उन वर्गों तक भी सूचना पहुंच रही है, जो पारंपरिक मीडिया के सीमित दायरे के कारण अपेक्षाकृत कम जुड़े हुए थे। डॉ. वत्स ने क्षेत्रीय भाषाओं की डिजिटल पत्रकारिता को स्थानीय समाज की आवाज को व्यापक मंच प्रदान करने वाला महत्वपूर्ण माध्यम बताया।
प्रस्तुति में पत्रकारों के संघर्ष और जनसेवा को किया याद:
अपने शोध-पत्र के प्रस्तुतीकरण के दौरान डॉ. मयंक वत्स ने डिजिटल क्रांति के जनक के रूप में स्मरण करते हुए भारत रत्न एवं पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने पत्रकारों के समर्पण, संघर्ष और जनसेवा की भावना को रेखांकित करते हुए पत्रकारों को समर्पित अपनी कविता की पंक्तियां भी प्रस्तुत कीं—
“रंग-बिरंगी दुनिया को हम ब्लैक एंड व्हाइट में लिखते हैं,
बुरे समय में लोगों के संग अक्सर ही हम दिखते हैं।
न शहीद का दर्जा मिलता, न सरकारी सहानुभूति,
सिर्फ पत्रकार ही अक्सर जनहित में मरते दिखते हैं।
पुस्तक में मिला स्थान, अकादमिक उपलब्धि को मिली नई पहचान:
डॉ. मयंक वत्स के शोध-पत्र को सेमिनार में प्रस्तुत देशभर के चयनित 30 शोध-पत्रों में शामिल किया गया। चयनित शोध-पत्रों को पुस्तक के रूप में प्रकाशित किया गया है। पुस्तक का शीर्षक “Communication Studies in the Era of Social Media” है। इसके संपादक डॉ. बाला लखेंद्र हैं, जबकि प्रकाशन विजडम वर्ल्ड पब्लिकेशन, वाराणसी द्वारा किया गया है।शोध-पत्र का पुस्तक में प्रकाशित होना डॉ. वत्स की अकादमिक एवं शोधपरक गतिविधियों की महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
प्रधानाचार्य सहित महाविद्यालय परिवार ने दी बधाई:
इस उपलब्धि पर सबौर महाविद्यालय के प्रधानाचार्य प्रो. (डॉ.) संजय कुमार झा ने डॉ. मयंक वत्स को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि प्रतिष्ठित बनारस हिंदू विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में महाविद्यालय के शिक्षक की सहभागिता तथा उनके शोध-पत्र का चयनित आलेखों के साथ पुस्तक में प्रकाशित होना महाविद्यालय के लिए गौरव की बात है।
उन्होंने डॉ. वत्स के उज्ज्वल शैक्षणिक एवं शोधपरक भविष्य की कामना करते हुए कहा कि ऐसी अकादमिक उपलब्धियां महाविद्यालय के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को शोध और ज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं।
डॉ. मयंक वत्स की उपलब्धि पर महाविद्यालय के शिक्षक प्रो. डॉ. पारस मणि झा, डॉ. नाज परवीन, डॉ. राकेश रंजन, डॉ. मनिलाल पासवान, डॉ. कुमार नित्य गोपाल, डॉ. नीरज कुमार सिन्हा, डॉ. मो. शहाबुद्दीन, डॉ. रंजना कुमारी, डॉ. अनीता कुमारी, डॉ. सत्येंद्र कुमार, डॉ. अभिषेक कुमार, डॉ. मेघा सिंह, डॉ. सरोज कुमार, डॉ. वीरेंद्र कुमार एवं डॉ. विपुल कुमार सहित महाविद्यालय के प्रधान सहायक श्री राकेश ठाकुर तथा शिक्षकेत्तर कर्मचारियों ने हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
महाविद्यालय परिवार ने आशा व्यक्त की कि डॉ. मयंक वत्स भविष्य में भी अपने शोध, लेखन एवं अकादमिक गतिविधियों के माध्यम से तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय एवं सबौर महाविद्यालय का नाम राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय अकादमिक मंचों पर गौरवान्वित करते रहेंगे।


