MMDR बिल पर सुबोध कांत सहाय ने केंद्र से पूछे 10 सवाल, कहा- झारखंड की आर्थिक स्वायत्तता पर हमला
रांची: पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय ने मंगलवार को कांग्रेस भवन में आयोजित प्रेस वार्ता में MMDR संशोधन विधेयक को झारखंड के आर्थिक हितों, राज्यों के संवैधानिक अधिकारों और संघीय ढांचे पर हमला बताया। उन्होंने केंद्र सरकार से 10 सवाल पूछते हुए कहा कि झारखंड की जमीन और खनिज संपदा पर पहला अधिकार यहां की जनता का है।
सुबोध कांत सहाय ने कहा कि झारखंड अपनी खनिज संपदा से देश के ऊर्जा और औद्योगिक विकास में बड़ा योगदान देता है, लेकिन जब राज्य इसी संपदा से अपने विकास के लिए राजस्व जुटाना चाहता है तो उसके अधिकारों को सीमित करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि MMDR संशोधन केवल खनन का कानून नहीं, बल्कि झारखंड की आर्थिक और संघीय स्वायत्तता का सवाल है।
उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार के 2026-27 के बजट में Mineral Bearing Land Cess से करीब 14 हजार करोड़ रुपये के राजस्व का अनुमान है। ऐसे में केंद्र सरकार स्पष्ट करे कि यदि इस संभावित राजस्व पर रोक लगती है तो इसकी भरपाई कौन करेगा। उन्होंने सवाल किया कि खनिज की वजह से होने वाला विस्थापन, प्रदूषण और सामाजिक-पर्यावरणीय बोझ झारखंड उठाए, लेकिन राजस्व और नीतिगत फैसले दिल्ली से क्यों लिए जाएं।
सहाय ने 2024 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद संशोधन लाए जाने, पुराने बकाये को समाप्त करने और राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता सीमित करने के प्रावधानों पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि राजस्व में कमी का सबसे ज्यादा असर खनन प्रभावित आदिवासी क्षेत्रों के सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और रोजगार जैसे विकास कार्यों पर पड़ेगा।
उन्होंने झारखंड के भाजपा सांसदों से भी राज्य के हित में संसद में आवाज उठाने की अपील की। सहाय ने कहा कि खनिज संपदा झारखंड की है तो उसके लाभ में पहला और न्यायसंगत हिस्सा भी झारखंड की जनता का होना चाहिए। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से दलगत राजनीति से ऊपर उठकर राज्य के आर्थिक हितों और संघीय अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होने की अपील की। प्रेस वार्ता में राकेश सिन्हा, सोनल शांति, कमल ठाकुर और उज्जल तिवारी मौजूद थे।


