15–20 वर्षों से कार्यरत संविदा कर्मियों ने सीधे नियमितीकरण की मांग उठाई

रांची: झारखंड सरकार के विभिन्न विभागों में पिछले 15 से 20 वर्षों से कार्यरत संविदा, एकमुश्त, अनुबंध एवं दैनिक कर्मियों ने मुख्यमंत्री से सीधे नियमितीकरण की मांग की है। कर्मियों का कहना है कि मीडिया में यह खबर आ रही है कि स्थायीकरण के लिए प्रतियोगिता परीक्षा देनी होगी और कार्यानुभव के आधार पर केवल 15 प्रतिशत वेटेज दिया जाएगा। उनका कहना है कि यह व्यवस्था लंबे समय से सेवा दे रहे कर्मियों के लिए व्यावहारिक नहीं है।
कर्मियों ने कहा कि अधिकांश कर्मचारियों की आयु 50 से 55 वर्ष से अधिक हो चुकी है। वर्षों तक सरकारी कार्यालयों में सेवा देने और पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण अब प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करना उनके लिए संभव नहीं है। ऐसे में 15 प्रतिशत वेटेज का प्रावधान उन्हें नियमितीकरण का वास्तविक लाभ नहीं दिला पाएगा।
उन्होंने सरकार से मांग की कि जिस प्रकार पारा शिक्षकों के लिए विशेष परीक्षा और आरक्षित पदों के माध्यम से नियमितीकरण का प्रावधान किया गया था, उसी प्रकार संविदा, अनुबंध और दैनिक कर्मियों के लिए भी अलग व्यवस्था बनाई जाए। कर्मियों का कहना है कि कई विभागों में बिना प्रतियोगिता परीक्षा के भी कर्मचारियों का समायोजन किया जा चुका है।
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि वर्ष 2019 में सरकार बनने के बाद संविदा कर्मियों के नियमितीकरण का आश्वासन दिया गया था, लेकिन छह वर्ष बीत जाने के बावजूद यह मांग पूरी नहीं हुई। कर्मियों ने मुख्यमंत्री से उनके लंबे कार्यानुभव को आधार बनाकर सीधे समायोजन एवं नियमितीकरण का आदेश जारी करने की अपील की है।

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