यूएस ट्रेड डील पर कांग्रेस का तीखा प्रहार, किसानों और अर्थव्यवस्था पर खतरे की आशंका
रांची: अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव प्रणव झा ने केंद्र सरकार द्वारा किए गए हालिया यूएस ट्रेड समझौते को देशहित के विरुद्ध बताते हुए गंभीर सवाल उठाए हैं। सोमवार को कांग्रेस भवन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा कि यह डील पूरी तरह अमेरिका के पक्ष में झुकी हुई है और इससे भारत की अर्थव्यवस्था, कृषि और छोटे उद्योगों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि देश की नीतियां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तय कर रहे हैं या अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव में फैसले हो रहे हैं।
प्रणव झा ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2025 में भारत का अमेरिका को 86 बिलियन डॉलर का निर्यात और 46 बिलियन डॉलर का आयात था, जिससे 40 बिलियन डॉलर का व्यापार अधिशेष (ट्रेड सरप्लस) बनता था। लेकिन अब अमेरिका से 100 बिलियन डॉलर के अतिरिक्त आयात की बाध्यता से यह संतुलन व्यापार घाटे में बदल सकता है। उन्होंने कहा कि चीन के साथ पहले से ही 116 बिलियन डॉलर का व्यापार घाटा है, ऐसे में यह समझौता आर्थिक दबाव को और बढ़ाएगा।
कृषि क्षेत्र को लेकर भी कांग्रेस ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। झा ने कहा कि अमेरिकी किसानों को सालाना लगभग 64 लाख रुपये तक की सब्सिडी मिलती है, जबकि भारतीय किसानों को मुश्किल से 12 हजार रुपये। ऐसे में कृषि बाजार खोलने से भारतीय किसान प्रतिस्पर्धा में पिछड़ जाएंगे। कपास किसानों पर संभावित असर का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अमेरिका द्वारा भारतीय टेक्सटाइल उत्पादों पर 18% टैरिफ और बांग्लादेश पर 0% टैरिफ लगाए जाने से भारत के कपास निर्यात पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने कहा कि यह समझौता देश की आर्थिक संप्रभुता से समझौता है। उनका आरोप था कि 2014 से पहले मैन्युफैक्चरिंग का जीडीपी में हिस्सा 17% था, जो अब घटकर 12.5% रह गया है। ‘मेक इन इंडिया’ का सपना अब ‘इंपोर्ट फ्रॉम एब्रॉड’ में बदलता दिख रहा है।
संवाददाता सम्मेलन में रविंद्र सिंह, राकेश सिन्हा, सतीश पॉल मुजनी, सोनाल शांति और रियाजुल अंसारी भी उपस्थित थे।



