‘मखाना बोलेगा, बिहार गायेगा’, रचनात्मकता को मिलेगा मंच, बीएयू की अनोखी पहल, गीत, कविता और कोट पर होंगे प्रतिभागी सम्मानित
भागलपुर। मिथिला मखाना को देश-दुनिया में पहचान दिलाने की दिशा में बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) ने एक नई और रचनात्मक पहल की है। मखाना की ब्रांडिंग को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय ने एक विशेष प्रतियोगिता की घोषणा की है, जिसका आकर्षक विषय रखा गया है – ‘मखाना बोलेगा, बिहार गाएगा’।
इस प्रतियोगिता के तहत प्रतिभागियों को मखाना पर आधारित लोकगीत, कविता और प्रेरक कोट तैयार करने का अवसर मिलेगा। बीएयू का मानना है कि जब तक किसी उत्पाद की कहानी गीत, साहित्य और भावनाओं से नहीं जुड़ती, तब तक वह लोगों के दिलों तक नहीं पहुंच पाती। इसी सोच के साथ यह रचनात्मक मंच तैयार किया गया है।बीएयू के कुलपति प्रो. दुनिया राम सिंह ने इस प्रतियोगिता के संचालन और समन्वय की जिम्मेदारी विश्वविद्यालय के मीडिया सेंटर को सौंपी है। प्रतिभागी अपनी रचनाएं टेक्स्ट के साथ-साथ ऑडियो या वीडियो फ़ॉर्मेट में भी भेज सकते हैं, ताकि मखाना की पहचान को और अधिक प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया जा सके।
ऐसे भेजें अपनी रचना
प्रतिभागी अपनी सामग्री ईमेल के माध्यम से baumediacentre@gmail.com पर भेज सकते हैं। इसके अलावा व्हाट्सएप नंबर 9931488832 और 9470434434 पर भी रचनाएं स्वीकार की जाएंगी। सामग्री भेजने के साथ पंजीकरण अनिवार्य होगा। रचना भेजने की अंतिम तिथि 31 जनवरी 2026 निर्धारित की गई है।
ज्यूरी करेगी चयन, मिलेंगे आकर्षक पुरस्कार
बीएयू के अधिकारियों के अनुसार, प्राप्त गीतों, कविताओं और कोट्स में से श्रेष्ठ रचनाओं का चयन विशेषज्ञ ज्यूरी द्वारा किया जाएगा। चयनित प्रतिभागियों को नकद पुरस्कार के साथ-साथ प्रमाण-पत्र और स्मृति-चिह्न (मोमेंटो) देकर सम्मानित किया जाएगा।
विश्वविद्यालय का यह प्रयास न केवल मखाना को एक कृषि उत्पाद के रूप में, बल्कि बिहार की सांस्कृतिक पहचान के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। बीएयू की इस पहल से युवाओं, कलाकारों और रचनाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने के साथ-साथ बिहार के गौरव को स्वर देने का अवसर मिलेगा।



