रवीन्द्रनाथ टैगोर की विकृत प्रतिमा पर बांग्ला समाज में रोष, उपायुक्त को सौंपा गया ज्ञापन
रांची : रांची स्थित रवीन्द्र भवन में कविगुरु रवीन्द्रनाथ टैगोर की प्रतिमा स्थापित किए जाने को लेकर बांग्ला समाज में गहरा आक्रोश है। समाज का कहना है कि प्रस्तावित प्रतिमा कविगुरु के वास्तविक स्वरूप, व्यक्तित्व और गरिमा से मेल नहीं खाती, बल्कि एक विकृत और असंगत रूप प्रस्तुत करती है।
इस मुद्दे पर “अस्तित्व – अखिल भारतीय बांग्ला भाषी समन्वय परिषद” के बैनर तले विभिन्न संगठनों और सांस्कृतिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने बुधवार को उपायुक्त, रांची को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में प्रतिमा के स्वरूप की पुनर्समीक्षा की मांग की गई है। परिषद ने अनुरोध किया है कि कला विशेषज्ञों, इतिहासकारों और बांग्ला समाज के प्रतिनिधियों की एक समिति गठित की जाए, जो प्रतिमा के स्वरूप की समीक्षा करे। साथ ही जब तक समीक्षा पूरी न हो, प्रतिमा के अनावरण को स्थगित रखने और कार्यक्रम को आदमकद पोस्टर के माध्यम से आयोजित करने का आग्रह किया गया है।
परिषद के केंद्रीय अध्यक्ष अभिजीत दत्ता गुप्ता ने कहा, “यह किसी प्रकार का विरोध नहीं, बल्कि कविगुरु के प्रति सच्ची श्रद्धा और सम्मान की रक्षा का प्रयास है। रवीन्द्रनाथ टैगोर भारत की आत्मा और सांस्कृतिक चेतना के प्रतीक हैं — उनके प्रति किसी भी असंवेदनशीलता को समाज स्वीकार नहीं कर सकता।”
इस अवसर पर अभिजीत भट्टाचार्य, रिंकू बनर्जी, सुदिप्तो भट्टाचार्य, तरुण कुंडु, राजा सेन, रीता डे, देबाशिष दत्ता, सुबीर लाहिड़ी, प्रणब चौधरी सहित कई सांस्कृतिक कार्यकर्ता और समाज के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।



