भागलपुर की जंग: क्या भाजपा का ‘रोहित’ इस  बार ‘अजीत’ को चौका मारने से रोक पाएगा!

भागलपुर। इस बार की सियासी रणभूमि में भागलपुर सदर सीट का मुकाबला किसी फिल्मी क्लाइमैक्स से कम नहीं दिख रहा है। भाजपा के युवा चेहरा रोहित पांडेय फिर से मैदान में हैं, और उनके सामने हैं कांग्रेस के अनुभवी खिलाड़ी अजीत शर्मा, जो लगातार तीन बार से इस सीट पर कब्जा जमाए हुए हैं। वैसे और कई चेहरे इस दंगल में हैं परंतु सबके सब कागज की नाव के मांझी साबित हो रहे हैं। अब सवाल हवा में तैर रहा है कि क्या रोहित इस बार अजीत को ‘चौका’ मारने से रोक पाएंगे! क्या अजीत की चौथी ‘जीत’ में रोहित ‘कील’ ठोंक पाएगा।

पिछले चुनावों में संगठन के भीतर की मनमुटाव और खींचतान ने भाजपा को सिरदर्द दिया था, जिसके कारण चेहरे बदलने के बावजूद पार्टी को लगातार हार का सामना करना पड़ा। लेकिन इस बार हालात कुछ बदले-बदले नजर आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि पार्टी ने घर की अंदरूनी कड़वाहट को ‘गंगाजल’ से ‘शुद्ध’ कर डाला है। टिकट की दौड़ में शामिल करीब आधा दर्जन क्षत्रपों को मना लिया गया है। पटना से लेकर दिल्ली तक के रणनीतिकारों ने भागलपुर में डेरा डाल दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी आगामी 6 नवंबर को भागलपुर आएंगे और चुनावी अलख जगाएंगे। संगठन के वरिष्ठ नेता, पूर्व मंत्री और स्थानीय कार्यकर्ता सब एक ही नारे पर जुटे हैं – ‘अबकी बार, भागलपुर में कमल खिलना तय है।’

पिछले चुनाव में यह देखा गया था कि यहां मतदान का प्रतिशत अपेक्षाकृत कम रहा। खासकर भाजपा के मजबूत बूथों पर मतदान की सुस्ती परिणाम पर असर डालती रही है। भाजपा कार्यकर्ताओं को इस बार इस ओर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।उधर, जन सुराज का चेहरा समीकरण को थोड़े समय के लिए गड्डमड्ड करता दिख रहा है।

कांग्रेस के अजीत शर्मा अपनी परंपरागत पकड़ और लोकप्रियता पर भरोसा जता रहे हैं और जीत का चौका लगाने को आतुर हैं। शहर के बीचोंबीच से लेकर वार्डों तक उनका जनसंपर्क नेटवर्क अब भी मजबूत माना जाता है। उनकी तुरुप का पत्ता – अभिनेत्री बेटी नेहा शर्मा जैसे ही चुनाव प्रचार में उतरती हैं, चुनावी मैदान का रंग बदल उठता है। रोड शो जैसे धारदार नुस्खे विरोधियों को चारों खाने चित कर देते हैं। युवा वोटर नेहा के हवाई इशारों पर झूम उठते हैं। उनके समर्थकों का कहना है, ‘अजीत जी हर वक्त मैदान में दिखते हैं।’ वहीं, विरोधियों का तर्क है कि मतदाता इस बार बदलाव के मूड में हैं – ‘इस बार फिल्मी अंदाज़ भी काम नहीं आएगा।’

भागलपुर की फ़िज़ा में इन दिनों चुनावी कबूतर खूब परवाज़ भर रहे हैं। चाय की दुकानों से लेकर बाजार की गलियों तक चर्चा गर्म है कि क्या भाजपा का रोहित पिछली हार की भरपाई कर पाएंगे! क्या अजीत शर्मा की चौथी पारी तय है या इस बार जनता कुछ नया लिखेगी! और सबसे बड़ा सवाल – किस ओर झुकेगा भागलपुर का वोट?

मतदाताओं का विवरण:

कुल मतदाता: 3,43,992

पुरुष: 1,75,744

महिला: 1,68,228

थर्ड जेंडर: 20

दिव्यांग: 2,245

85 वर्ष से अधिक: 1,960

सेवा मतदाता: 585

अंतिम मुकाबले का इशारा

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस सीट पर जातीय समीकरण और युवा चेहरों की अपील – दोनों मिलकर परिणाम तय करेंगे।भाजपा की संगठनात्मक ताकत और कांग्रेस की जमीनी साख के बीच यह टक्कर दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गई है।फिलहाल, भागलपुर की जनता मुस्कुरा रही है और कह रही है – ‘चुनाव है भई… अभी बहुत कुछ बाकी है!’

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