एआई से बनी चुनावी प्रचार सामग्री पर अब ‘सख्ती’निर्वाचन आयोग ने जारी की नई एडवाइजरी

भागलपुर। बिहार विधानसभा आम निर्वाचन 2025 की तैयारियों के बीच भारत निर्वाचन आयोग ने चुनाव प्रचार के दौरान एआई (Artificial Intelligence) और डिजिटल तकनीक के गलत इस्तेमाल पर नकेल कस दी है। आयोग ने सभी राजनीतिक दलों को सख्त निर्देश देते हुए कहा है कि प्रचार सामग्री में अगर एआई या डिजिटल रूप से तैयार किया गया कोई हिस्सा शामिल है, तो उसे स्पष्ट रूप से चिन्हित करना अनिवार्य होगा।

“AI Generated” या “Synthetic Content” लिखना होगा अनिवार्य

नई एडवाइजरी के मुताबिक, किसी भी प्रचार सामग्री चाहे वह वीडियो, ऑडियो या इमेज हो यदि वह एआई से तैयार या डिजिटल रूप से बदली हुई है, तो उस पर साफ़ और बड़े अक्षरों में “AI Generated”, “Digitally Enhanced” या “Synthetic Content” का लेबल लगाना अनिवार्य होगा।
यह लेबल डिस्प्ले के कम से कम 10 प्रतिशत हिस्से पर और वीडियो में स्क्रीन के ऊपरी हिस्से में दिखाया जाएगा। ऑडियो सामग्री में भी शुरुआती 10 प्रतिशत अवधि तक इस बात का उल्लेख होना चाहिए कि यह एआई-जनरेटेड है।

बिना सहमति किसी की आवाज़ या रूप दिखाना गैरकानूनी

आयोग ने चेतावनी दी है कि किसी व्यक्ति की पहचान, रूप या आवाज़ को उसकी सहमति के बिना एआई या डिजिटल तकनीक के ज़रिए बदलकर प्रसारित करना गैरकानूनी है। ऐसी किसी भी सामग्री से मतदाताओं को गुमराह करने या धोखा देने की कोशिश चुनावी आचार संहिता और आईटी अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध होगी।

तीन घंटे में हटानी होगी गलत सामग्री

निर्वाचन आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी राजनीतिक दल के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर फर्जी या भ्रामक एआई सामग्री पाई जाती है, तो नोटिस या रिपोर्ट मिलने के तीन घंटे के भीतर उसे हटाना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही, राजनीतिक दलों को सभी एआई-जनरेटेड प्रचार सामग्री का रिकॉर्ड रखना होगा, जिसमें कंटेंट तैयार करने वाले व्यक्ति या एजेंसी का नाम और समय का उल्लेख अनिवार्य होगा।

पहले भी जारी हो चुकी हैं हिदायतें

चुनाव आयोग ने इससे पहले 6 मई 2024 को सोशल मीडिया के जिम्मेदार इस्तेमाल को लेकर दिशानिर्देश जारी किए थे, और 16 जनवरी 2025 को विशेष रूप से सिंथेटिक प्रचार सामग्री पर चिंता जताई थी। अब नई एडवाइजरी में इन निर्देशों को और कठोर बनाया गया है ताकि फर्जी वीडियो, डीपफेक ऑडियो और डिजिटल हेराफेरी के ज़रिए मतदाताओं को गुमराह करने की प्रवृत्ति पर रोक लगाई जा सके।

पारदर्शिता और भरोसा बनाए रखना आवश्यक

आयोग ने कहा है कि चुनावों में एआई तकनीक का दुरुपयोग “लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा” है। ऐसे में आवश्यक है कि पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहे ताकि मतदाता स्वतंत्र रूप से, सही जानकारी के आधार पर निर्णय ले सकें। आयोग ने राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे “चुनावी ईमानदारी” को सर्वोच्च प्राथमिकता दें और टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल ज़िम्मेदारी के साथ करें।

तुरंत प्रभाव से लागू होंगे निर्देश

भारत निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह निर्देश तुरंत प्रभाव से लागू होंगे और आगामी सभी आम एवं उपचुनावों में लागू रहेंगे, जब तक कि आयोग द्वारा अन्य आदेश न जारी किए जाएँ।

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