झारखंड की राजनीति में अगला दो सप्ताह अहम, पिक्चर हो जाएगा क्लीयर
रांचीः झारखंड में राजनीति के लिए अगला दो सप्ताह काफी अहम माना जा रहा है। सियासत के गलियारों में इसकी चर्चा तेज है। हालांकि सत्ता धारी दल के लोगों का कहना है कि ऑल इज वेल। कहीं कोई संकट नहीं है। जेएमएम के वरिष्ठ नेता ऑफिस ऑफ प्रोफिट मामले में ज्यादा बोलने से बच भी रहे हैं। वहीं झारखंड के कांग्रेस प्रभारी अविनाश पांडे ने साफ किया कि कांग्रेस पूरी तरह मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के समर्थन में खड़ी है. न्यायिक प्रक्रिया शुरू है. उस पर हमें पूर्ण विश्वास है कि उसे गलत साबित करने में सफल होंगे. पूरी मजबूती के साथ पांच साल का टर्म यूपीए सरकार पूरा करेगी लेकिन संवैधानिक संस्थाओं हर विंदु पर गहन पड़ताल के बाद ही निर्णय लेंगी। इस वजह से झारखंड के लिए अगला दो सप्ताह महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ताजा जानकारी के मुताबिक चुनाव आयोग ऑफिस ऑफ प्रोफिट मामले में गहनता से पड़ताल कर रहा है। साथ ही तमाम बिंदुओं पर जांच की जा रही है। खदान लीज लेने के मामले में कानूनी तथ्यों को भी जांचा जा रहा है। जो भी हो लेकिन संकट के बादल छंटे नहीं है। कानून के जानकारों के अनुसार इस तरह के मामलों में किसी को पद से हटाने के लिए तीन शर्तें होती हैं। पहली शर्त यह कि एक ही व्यक्ति विशेष के पास कोई दो पद होना चाहिए।
दूसरी शर्त यह है कि इसके तहत जिम्मेवार व्यक्ति एक महत्वपूर्ण पद पर रहते हुए किसी से कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष लाभ हासिल करता है। तीसरी शर्त यह है कि सरकारी पद पर रहने वाला अगर अन्य माध्यमों से कमाई कर रहा है। फिलहाल मामला झारखंड उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। चुनाव आयोग भी इस पूरे मामले में रिपोर्ट तलब कर चुका है। ऐसे में अब इन संवैधानिक संस्थाओं को ही फैसला करना है। संवैधानिक नियम यह है कि राज्यपाल इस मामले को जांच के लिए चुनाव आयोग को भेजते हैं। जिस पर चुनाव आयोग अपनी जांच करता है। इसके बाद जांच रिपोर्ट मंतव्य के लिए सुप्रीम कोर्ट को भेजा जाता है। सुप्रीम कोर्ट का मंतव्य मिलने के बाद चुनाव आयोग राज्यपाल को रिपोर्ट सौंपता है। जिस पर किसी व्यक्ति विशेष को पद से हटाने की कार्रवाई होती है।

