बाबा कार्तिक उरांव की जयंती पखवाड़ा दिवस के रूप में मनाई गई, उनके आदर्शों पर चलने का लिया संकल्प

रांची: जनजाति सुरक्षा मंच की ओर से धरती आबा और आदिवासी समाज के प्रखर नेता बाबा कार्तिक उरांव की जयंती पखवाड़ा दिवस के रूप में मनाई गई। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत बाबा कार्तिक उरांव की तस्वीर पर दीप प्रज्वलित और पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि देने के साथ हुई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व सांसद एवं पूर्व मंत्री सुदर्शन भगत तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में पूर्व राज्यसभा सांसद समीर उरांव उपस्थित रहे। रांची की महापौर रोशनी खलखो, केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष बबलू मुंडा समेत कई सामाजिक अगुवाओं ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
मुख्य अतिथि सुदर्शन भगत ने कहा कि जनजाति सुरक्षा मंच बाबा कार्तिक उरांव के अधूरे कार्यों और विचारों को आगे बढ़ाने का काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज की मूल परंपरा, संस्कृति और रीति-रिवाजों की रक्षा करना जरूरी है।
विशिष्ट अतिथि समीर उरांव ने बाबा कार्तिक उरांव के जीवन और संघर्षों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि 29 अक्टूबर 1924 को गुमला जिले के सिसई प्रखंड के करौंदा लिटाटोली में जन्मे कार्तिक उरांव ने बेहद गरीबी में रहकर शिक्षा हासिल की। पटना से इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद वे उच्च शिक्षा के लिए विदेश गए। उन्होंने आदिवासी समाज के उत्थान, शिक्षा और अधिकारों के लिए जीवनभर संघर्ष किया।
समीर उरांव ने कहा कि कांके में बिरसा कृषि विश्वविद्यालय, धुर्वा में एचईसी और आदिवासी समाज को संगठित करने के प्रयासों में कार्तिक उरांव की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने केंद्रीय सरना स्थल सिरमटोली की जमीन बचाने, सरहुल शोभायात्रा में आदिवासियों को एकजुट करने और अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद के गठन में भी योगदान दिया।
वक्ताओं ने उनके द्वारा संसद में जनजातीय आरक्षण से जुड़े प्रस्ताव और उनकी पुस्तक ‘बीस साल की काली रात’ का भी उल्लेख किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता संदीप उरांव ने की, जबकि संचालन सुनील उरांव और धन्यवाद ज्ञापन सोमा उरांव ने किया। अंत में उपस्थित लोगों ने बाबा कार्तिक उरांव के आदर्शों पर निस्वार्थ भाव से चलने का संकल्प लिया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *