वो सात कलाकार जो दुआरे की शादी में ढोल बजाकर पेट पालते थे वे सदा के लिए चले गए
रांची: झारखंड के रामगढ़-बोकारो मुख्य मार्ग स्थित मारंगमरचा में सड़क दुर्घटना में सात लोगों की मौत हो गई। आज जो वहां सन्नाटा है, वो सिर्फ एक गांव का नहीं है। वो पूरे सिस्टम पर तमाचा है। हर बार हादसा होता है, हम आंकड़े गिनते हैं। 7 मरे, 2 गंभीर। पर इन आंकड़ों के पीछे जो 7 दुनिया उजड़ गईं, उसका हिसाब कौन देगा? भगवान उन परिवारों को ये दुख सहने की ताकत दे। और हम सबको इतनी इंसानियत दे कि अगली बार सड़क पर किसी को तेज रफ्तार में देखें तो टोक दें। शायद किसी का घर उजड़ने से बच जाए।
ये सिर्फ एक सड़क हादसा नहीं है। ये सात कहानियों का एक साथ खत्म हो जाना है। सोचिए, वो सात कलाकार जो दूसरों की शादी में ढोल बजाकर पेट पालते थे, आज उनके घर में मातम का सन्नाटा है। सबसे दर्दनाक है वो इंतजार। घर में बैठी मां को क्या पता था कि बेटा अब कभी “मां भूख लगी है” नहीं कहेगा। बीवी को क्या पता था कि सुहाग की निशानी उतारनी पड़ेगी। बच्चों को क्या पता था कि पापा की उंगली पकड़कर मेला देखने का सपना, सपना ही रह जाएगा।
लारी की उस सड़क पर सिर्फ पिकअप नहीं पिचकी, सात परिवारों की पूरी जिंदगी पिचक गई। मौके पर ही सात सांसें थम गईं। खून से सने वो ढोल गवाही दे रहे हैं कि गरीब की जिंदगी कितनी सस्ती है। दो वक्त की रोटी कमाने निकले थे, कफन नसीब हो गया। काश हमारी सड़कें इतनी बेरहम न होतीं। काश कोई तो होता जो कहता “रात ज्यादा हो गई है, सुबह निकलना”। पर अब काश से क्या होगा।

