कटाव निरोधी कार्य में लगी मजदूरों से भरी नाव पलटी, 21 जिंदगियां पानी में समाईं; 12 ने खुद तैरकर जान बचाई, नाविक समेत दो लापता
प्रदीप विद्रोही,भागलपुर: गंगा की तेज धार के बीच बुधवार को एक ऐसा हादसा हुआ, जिसने बाढ़ और कटाव निरोधी कार्य की पूरी तस्वीर पर सवाल खड़े कर दिए। खरीक प्रखंड के राघोपुर इलाके में टूटे तटबंध के पास रेत की बोरियां लेकर जा रही मजदूरों से भरी नाव बीच गंगा में पलट गई। नाव पर नाविक समेत करीब 21 लोग सवार बताए जा रहे हैं। हादसे के बाद देखते ही देखते मजदूर उफनती गंगा में कूदने लगे। कुछ ने तैरकर किनारा पकड़ा, तो कुछ को स्थानीय प्रशासन और SDRF की टीम ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर बाहर निकाला।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, राघोपुर गांव के पास तटबंध टूटने के बाद कटाव रोकने और तटबंध को सुरक्षित करने के लिए रेत की बोरियां पहुंचाई जा रही थीं। इसी काम में मजदूर नाव से नदी पार कर रहे थे। बताया जा रहा है कि नाव पर बड़ी संख्या में मजदूरों के साथ रेत की बोरियां भी लदी थीं। ओवरलोडिंग के कारण बीच धारा में नाव का संतुलन बिगड़ गया और वह अनियंत्रित होकर पलट गई।नाव के पलटते ही गंगा की तेज धार में चीख-पुकार मच गई। कुछ मजदूरों ने हिम्मत दिखाई और नाव से कूदने के बाद तैरकर सुरक्षित बाहर निकल आए।
12 ने खुद तैरकर बचाई जान:
हादसे के बाद शुरुआती तौर पर 12 मजदूर तैरकर सुरक्षित नदी से बाहर निकल आए। इसके बाद लापता लोगों की तलाश शुरू हुई। स्थानीय प्रशासन और SDRF की टीम ने नदी में सघन तलाशी अभियान चलाया। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान करीब सात और लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इस तरह अब तक 19 लोगों के सुरक्षित होने की सूचना है।
नाविक समेत दो अब भी लापता:
हादसे के बाद सबसे बड़ी चिंता अब भी दो लोगों को लेकर बनी हुई है। प्राप्त सूचना के अनुसार, एक नाविक और लोदीपुर निवासी एक मजदूर बादल कुमार लापता हैं। लापता मजदूर की पहचान बादल कुमार, पिता सिकंदर मंडल, निवासी लोदीपुर के रूप में बताई जा रही है। गंगा की तेज धारा और बढ़े जलस्तर के बीच दोनों की तलाश चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। SDRF और स्थानीय प्रशासन की टीम नदी में खोज अभियान चला रही है।
टूटे तटबंध को बचाने निकले थे, खुद गंगा के शिकार हुए मजदूर:
इस हादसे की सबसे बड़ी विडंबना यही है कि मजदूर जिस काम के लिए नाव पर सवार हुए थे, वह खुद गंगा के कहर से लोगों को बचाने का काम था।राघोपुर के पास तटबंध टूटने के बाद पानी और कटाव का दबाव बढ़ा है। इसी खतरे को कम करने के लिए रेत की बोरियां पहुंचाई जा रही थीं। लेकिन बीच गंगा में नाव पलटने से राहत और बचाव के इस अभियान में ही बड़ा संकट खड़ा हो गया।
सवाल नाव की क्षमता और सुरक्षा इंतजाम पर भी:
नाव पर मजदूरों के साथ बड़ी मात्रा में रेत की बोरियां लदी होने की बात सामने आने के बाद ओवरलोडिंग को हादसे की संभावित वजह माना जा रहा है। हालांकि, हादसे के वास्तविक कारणों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
बढ़ते जलस्तर, तेज बहाव और नदी में बन रही घिरनी के बीच नावों से मजदूरों और निर्माण सामग्री का परिवहन पहले से ही जोखिम भरा है। ऐसे में नाव की क्षमता, मजदूरों की संख्या और सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। फिलहाल राघोपुर में राहत और बचाव अभियान जारी है। प्रशासन की कोशिश लापता दोनों लोगों को जल्द से जल्द तलाशने की है।


