विक्रमशिला सेतु: ‘फॉल्स दीवार’ गिरी, लेकिन असली खतरा अभी भी बरकरार !
भागलपुर। गंगा की धार के बीच खड़ा भागलपुर का ऐतिहासिक विक्रमशिला सेतु इन दिनों चर्चा में है।कारण, सेतु के नीचे बनी एक ‘फॉल्स दीवार’ का अचानक नदी में समा जाना। जहां एक ओर पुल निर्माण निगम के अभियंता इसे तकनीकी प्रक्रिया का हिस्सा बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सेतु की हालत को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
क्या है पूरा मामला:पुल निर्माण निगम के वरीय परियोजना अभियंता ज्ञान चंद्र दास के अनुसार, ‘फॉल्स दीवार अस्थायी होती है, जिसे निर्माण के दौरान पानी के दबाव को नियंत्रित करने के लिए बनाया जाता है। यह पुल का हिस्सा नहीं है।’ उनका कहना है कि यह दीवार पहले ही हटाई जानी थी, लेकिन किसी कारणवश रह गई थी और अब उसका गिरना स्वाभाविक प्रक्रिया का हिस्सा है।
लेकिन खतरे की घंटी क्यों:तकनीकी सफाई के बावजूद, जमीनी हकीकत कुछ और कहानी कह रही है – सेतु के पिलर संख्या 17, 18 और 19 की प्रोटेक्शन वॉल क्षतिग्रस्त,एक पिलर की सुरक्षा दीवार पूरी तरह ध्वस्त,तेज बहाव के कारण पिलरों पर बढ़ता दबाव,मुख्य ढांचे को नुकसान की आशंका।विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर समय रहते मरम्मत नहीं हुई तो हालात गंभीर हो सकते हैं।
रोज़ गुजरते हैं हजारों लोग:
पुल की लंबाई: 4.7 किलोमीटर
रोजाना आवाजाही: 25,000+ वाहन
लाभान्वित लोग: 1 लाख से अधिक
साल 2001 में तत्कालीन मुख्यमंत्री राबड़ी देवी द्वारा उद्घाटित यह सेतु आज भी भागलपुर की लाइफलाइन बना हुआ है।
8 साल से मरम्मत नहीं:
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि – 2016 के बाद कोई बड़ी तकनीकी मरम्मत नहीं हुई। केवल रंग-रोगन कर ‘सुंदरता’ बढ़ाई गई।ओवरलोडेड ट्रकों से एक्सपेंशन जॉइंट का गैप 6 इंच तक पहुंच चुका है।
विशेषज्ञों की राय:
रिटायर्ड इंजीनियरों का मानना है कि -।गंगा का तेज बहाव,भारी जहाज और नावों की आवाजाही, बाढ़ के समय अतिरिक्त दबा। इन सबने मिलकर सेतु की सुरक्षा दीवारों को कमजोर कर दिया है।
प्रशासन क्या कह रहा है:
भागलपुर के जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने कहा – ‘मामले की जांच के लिए टीम भेजी गई है। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।’
फिलवक्त, एक ओर ‘फॉल्स दीवार’ गिरने को सामान्य बताया जा रहा है, लेकिन दूसरी ओर सेतु की बिगड़ती हालत भविष्य के खतरे का संकेत दे रही है।



